पिपरई। अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पिपरई नायब तहसीलदार द्वारा 24 घंटे के भीतर क्लीनिक और मेडिकल स्टोर पर की गई कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के क्लीनिक और मेडिकल स्टोर सील करने के मामले में विवाद खड़ा हो गया है।
अशोकनगर/पिपरई। अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियम तोड़ने वाले पिपरई नायब तहसीलदार 24 घंटे के भीतर ही बैकफुट पर आ गए। गुरुवार को जिन अवैध क्लीनिकों और पैथोलॉजी को सील किया गया था, शुक्रवार शाम होते-होते उनके ताले खुलवा दिए गए। वहीं शुक्रवार सुबह एक लैब से जब्त कर उठाई गई मशीन भी सम्मान के साथ वापस लौटानी पड़ी। अब कस्बे में चर्चा है कि आखिर 24 घंटे में ऐसा क्या चमत्कार हुआ कि कल तक अवैध दिखने वाले क्लीनिक आज अचानक वैध हो गए। गुरुवार को की थी कार्रवाई, डॉक्टर को मिला नोटिस गुरुवार को नायब तहसीलदार अंजनी कुमार चौधरी ने पिपरई कस्बे में मेडिकल ऑफिसर के बिना ही जांच की। एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे, संचालक ने कागज नहीं दिखाए तो मेडिकल सील कर दिया। इसके बाद एक पैथोलॉजी लैब से जांच की मशीन भी उठवाकर अपनी गाड़ी में रखवा ली। इस मनमानी की खबर जैसे ही कस्बे में फैली, मेडिकल, पैथोलॉजी और झोलाछाप डॉक्टरों में हड़कंप मच गया। विरोध स्वरूप कई दुकानें धड़ाधड़ बंद हो गईं।संचालकों ने कहा कि बिना ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी के मेडिकल स्टोर चेक करना और सील करना नियम विरुद्ध है। मामला जिला स्तर तक गूंजने लगा और विवाद बढ़ता देख तहसीलदार के सुर बदल गए। शाम होते-होते उन्होंने सील किया गया मेडिकल स्टोर और गुरुवार को सील की गई सभी पांच क्लीनिक-पैथोलॉजी खुलवा दीं। वहीं जब्त पैथोलॉजी मशीन भी वापस कर दी गई। यह कार्रवाई नायब तहसीलदार के गले की फांस बन गई। दरअसल स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के बिना इस कार्रवाई में शामिल होने पर मेडिकल ऑफिसर को उनके ही विभाग ने कारण बताओ नोटिस थमा दिया। एक्सपर्ट व्यू: बिना कलेक्टर के आदेश, नहीं कार्रवाई का अधिकार डॉ. जेआर त्रिवेदी, रिटायर्ड सीएमएचओ के अनुसार, क्लीनिक और लैब पर स्वास्थ्य विभाग का एक्ट लागू होता है, जहां केवल सीएमएचओ या गठित टीम ही कार्रवाई कर सकती है। टीम में एक क्लास-1 डॉक्टर व एक आयुष डॉक्टर जरूरी हैं। वहीं मेडिकल स्टोर सील करने का अधिकार केवल ड्रग इंस्पेक्टर को है। पुलिस केवल शिकायत पर कार्रवाई कर सकती है। तहसीलदार या नायब तहसीलदार केवल तभी जांच या सील की कार्रवाई कर सकते हैं, जब उनके पास कलेक्टर का आदेश हो।कहा था सब संभाल लूंगा, अब मुझे मिला नोटिस डॉ. आशीष पलिया, मेडिकल ऑफिसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरई के अनुसार, तहसीलदार मुझे कार्रवाई के लिए ले गए थे। मैंने उनसे पूछा था कि जांच में मेरा कोई आदेश है क्या? मैंने यह भी बताया था कि मेडिकल जांच के लिए ड्रग इंस्पेक्टर (डीआई) का होना जरूरी है। लेकिन उन्होंने कहा कि वो सब मुझ पर छोड़ो, मेरे पास उनका आदेश है, मैं सब संभाल लूंगा। अब जब मेरे विभाग के अधिकारियों को पता चला तो मुझे नोटिस जारी हो चुका है। अन्य महत्वपूर्ण बातें शुक्रवार को अकेले निकले, मशीन उठाई तो भड़का बाजार। बिना कागज दिखाए मेडिकल स्टोर सील किया गया। पैथोलॉजी लैब से मशीन जब्त की गई। विरोध के बाद पांच क्लीनिक और पैथोलॉजी खोली गईं। जब्त मशीन भी वापस करनी पड़ी।