📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President's Secretariat
मौसम
हिमाचल के राज्यपाल ने नेपाल में बाढ़ के बाद जलवायु परिवर्तन की चेतावनी दी
✍️ Mid-Day
🗓 29 अग. 2026, 09:03 PM
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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने नेपाल में हालिया बाढ़ के बाद जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को उजागर किया, क्षेत्रीय तैयारी को सुदृढ़ करने की अपील की।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने कहा कि नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। स्थिति की समीक्षा के बाद उन्होंने कहा कि अनियमित मौसम पैटर्न न केवल नेपाल बल्कि पड़ोसी भारतीय राज्यों को भी खतरे में डाल रहे हैं।
उन्होंने राज्य सरकारों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और पर्यावरणीय संस्थाओं के बीच समन्वित कार्रवाई की मांग की, ताकि प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके और बुनियादी ढाँचे की लचीलापन बढ़े। राज्यपाल ने केंद्रीय सरकार से हिमालय में जलवायु‑अनुकूलन परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया, क्योंकि जोखिम सीमा‑पार है।
इन टिप्पणियों के समय नेपाल भारी वर्षा से प्रभावित हो कर घरों, सड़कों और कृषि भूमि को गंभीर क्षति झेल रहा है। जबकि राज्यपाल ने कोई विशिष्ट आँकड़े नहीं दिए, उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाएँ भविष्य में अधिक बार हो सकती हैं, जब तक ठोस शमन कदम नहीं उठाए जाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय ग्लेशियल पिघलाव और अत्यधिक वर्षा के कारण विशेष रूप से संवेदनशील है, इसलिए क्षेत्रीय सहयोग आवश्यक है। राज्यपाल का यह आह्वान राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन नीतियों में जलवायु विचार को सम्मिलित करने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है।
यह बयान हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दिया गया, जहाँ अधिकारी नेपाल की बाढ़ के प्रभावों को स्थानीय तैयारी योजनाओं में शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
उन्होंने राज्य सरकारों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और पर्यावरणीय संस्थाओं के बीच समन्वित कार्रवाई की मांग की, ताकि प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके और बुनियादी ढाँचे की लचीलापन बढ़े। राज्यपाल ने केंद्रीय सरकार से हिमालय में जलवायु‑अनुकूलन परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया, क्योंकि जोखिम सीमा‑पार है।
इन टिप्पणियों के समय नेपाल भारी वर्षा से प्रभावित हो कर घरों, सड़कों और कृषि भूमि को गंभीर क्षति झेल रहा है। जबकि राज्यपाल ने कोई विशिष्ट आँकड़े नहीं दिए, उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाएँ भविष्य में अधिक बार हो सकती हैं, जब तक ठोस शमन कदम नहीं उठाए जाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय ग्लेशियल पिघलाव और अत्यधिक वर्षा के कारण विशेष रूप से संवेदनशील है, इसलिए क्षेत्रीय सहयोग आवश्यक है। राज्यपाल का यह आह्वान राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन नीतियों में जलवायु विचार को सम्मिलित करने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है।
यह बयान हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दिया गया, जहाँ अधिकारी नेपाल की बाढ़ के प्रभावों को स्थानीय तैयारी योजनाओं में शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।