📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Beddome, R. H.; Bentham, George
देश
जीसीसीआई ने केंद्र से पश्चिमी घाट में 21 गांवों को माइनिंग जोखिम से बाहर करने का आग्रह किया
✍️ The Times of India
🗓 27 सित. 2026, 07:02 AM
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गुजरात ग्रीन काउंसिल (जीसीसीआई) ने केंद्रीय सरकार से पश्चिमी घाट के पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन सूची से 21 गांवों को हटाने का आग्रह किया, माइनिंग जोखिमों के कारण स्थानीय समुदायों और पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ने वाले खतरे को लेकर।
गुजरात ग्रीन काउंसिल (जीसीसीआई) ने केंद्रीय सरकार से पश्चिमी घाट के पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (ESA) सूची से 21 गांवों को हटाने का औपचारिक अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि इस क्षेत्र में माइनिंग गतिविधियाँ इन समुदायों के लिए महत्वपूर्ण पारिस्थितिक और सामाजिक जोखिम पैदा कर सकती हैं।
जीसीसीआई के बयान में माइनिंग परियोजनाओं के कारण आवास विनाश, जल संदूषण और आजीविका में व्यवधान के संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है। काउंसिल यह भी बताती है कि पश्चिमी घाट, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, विविध वनस्पति और जीव-जंतु का घर है और क्षेत्रीय जल सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
केंद्रीय सरकार ESA सूची को अंतिम रूप देने के लिए जिम्मेदार है, जो विकास परियोजनाओं की स्वीकृति से पहले पर्यावरणीय जाँच के अधीन क्षेत्रों को निर्धारित करती है। जीसीसीआई का आग्रह है कि इन गांवों को सूची से हटाने से अपरिवर्तनीय क्षति रोकी जा सकेगी और निवासियों के अधिकारों की रक्षा होगी।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। काउंसिल का यह आह्वान पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में माइनिंग प्रस्तावों के मूल्यांकन के तरीके पर व्यापक बहस का हिस्सा है।
इस अनुरोध का परिणाम भारत में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
जीसीसीआई के बयान में माइनिंग परियोजनाओं के कारण आवास विनाश, जल संदूषण और आजीविका में व्यवधान के संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है। काउंसिल यह भी बताती है कि पश्चिमी घाट, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, विविध वनस्पति और जीव-जंतु का घर है और क्षेत्रीय जल सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
केंद्रीय सरकार ESA सूची को अंतिम रूप देने के लिए जिम्मेदार है, जो विकास परियोजनाओं की स्वीकृति से पहले पर्यावरणीय जाँच के अधीन क्षेत्रों को निर्धारित करती है। जीसीसीआई का आग्रह है कि इन गांवों को सूची से हटाने से अपरिवर्तनीय क्षति रोकी जा सकेगी और निवासियों के अधिकारों की रक्षा होगी।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। काउंसिल का यह आह्वान पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में माइनिंग प्रस्तावों के मूल्यांकन के तरीके पर व्यापक बहस का हिस्सा है।
इस अनुरोध का परिणाम भारत में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।