📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashish.prajapati90
शिक्षा
छत्तीसगढ़ HC ने 30 साल बाद टीनेज मामलों से बरी प्रोफ़ेसर की नौकरी बचाई
✍️ The Times of India
🗓 12 सित. 2026, 02:37 AM
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया है कि अपने किशोरावस्था के मामलों से बरी प्रोफ़ेसर को 30 साल बाद भी नौकरी से निकाला नहीं जा सकता।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक विश्वविद्यालय प्रोफ़ेसर की नौकरी को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है, जिनके खिलाफ उनके किशोरावस्था में आपराधिक आरोप लगाए गए थे, लेकिन बाद में सभी मामलों से बरी कर दिया गया था।
न्यायालय ने कहा कि प्रोफ़ेसर की तीस साल से अधिक की सेवा अवधि को पिछले अभियोगों के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि बरी होने के बाद कोई कानूनी बाधा नहीं रहती।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस सिद्धांत को सुदृढ़ करता है कि एक बार बरी हो जाने पर उस व्यक्ति की पेशेवर स्थिति को प्रभावित करने के लिये पूर्व आरोपों का उपयोग नहीं किया जा सकता। यह मामला राज्य के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में समान परिस्थितियों के लिये भी मिसाल बन सकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रोफ़ेसर को उसी पद पर बरकरार रखने का निर्देश दिया गया है, जिससे उनके कार्य में कोई बाधा न आए। न्यायालय का आदेश तुरंत लागू किया जाएगा।
यह मामला संस्थागत प्रतिष्ठा की रक्षा और कानूनी रूप से बरी व्यक्तियों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
न्यायालय ने कहा कि प्रोफ़ेसर की तीस साल से अधिक की सेवा अवधि को पिछले अभियोगों के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि बरी होने के बाद कोई कानूनी बाधा नहीं रहती।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस सिद्धांत को सुदृढ़ करता है कि एक बार बरी हो जाने पर उस व्यक्ति की पेशेवर स्थिति को प्रभावित करने के लिये पूर्व आरोपों का उपयोग नहीं किया जा सकता। यह मामला राज्य के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में समान परिस्थितियों के लिये भी मिसाल बन सकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रोफ़ेसर को उसी पद पर बरकरार रखने का निर्देश दिया गया है, जिससे उनके कार्य में कोई बाधा न आए। न्यायालय का आदेश तुरंत लागू किया जाएगा।
यह मामला संस्थागत प्रतिष्ठा की रक्षा और कानूनी रूप से बरी व्यक्तियों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।