📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Environment, Forest and Climate Change
देश
सीएक्यूएम ने दिल्ली के सर्दियों के धुंध को कम करने के लिए वाहन जांच और पुआल जलाने पर रोक की अपील
✍️ Business Standard
🗓 01 अक्टू. 2026, 07:32 PM
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सेंट्रल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली में सर्दियों के तीव्र प्रदूषण को कम करने के लिए वाहन जांच को कड़ा करने और पुआल जलाने पर रोक लगाने का आग्रह किया है।
सेंट्रल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली में सर्दियों के तीव्र प्रदूषण को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने का आग्रह किया है। एजेंसी ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सभी मोटर वाहनों की कड़ी जांच की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि वाहन उत्सर्जन पीएम2.5 और पीएम10 स्तरों को बढ़ा रहा है।
सीएक्यूएम ने पड़ोसी राज्यों में पुआल जलाने पर रोक लगाने की भी मांग की है, जिसे वह धुंध के प्रमुख स्रोत के रूप में पहचानता है, जो ठंड के महीनों में दिल्ली तक पहुँचती है। अधिकारियों का कहना है कि खुले खेतों में फसल अवशेष जलाने को रोकने से वायु में हानिकारक कणों की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आएगी।
दिसंबर‑जनवरी में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है, जिससे स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है। सीएक्यूएम का यह अपील पीक प्रदूषण अवधि से पहले आया है, जिसमें राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों से मौजूदा उत्सर्जन मानकों को लागू करने और किसानों को वैकल्पिक अवशेष प्रबंधन उपाय प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
हालाँकि यह सलाह कानूनी बाध्यता नहीं रखती, सीएक्यूएम ने बताया कि वह अनुपालन की निगरानी करेगा और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को डेटा साझा करेगा, जिससे आगे की नीति कार्रवाई संभव हो सके। एजेंसी ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए वाहन मालिकों, परिवहन ऑपरेटरों और कृषि हितधारकों का सामूहिक सहयोग आवश्यक है।
सीएक्यूएम ने पड़ोसी राज्यों में पुआल जलाने पर रोक लगाने की भी मांग की है, जिसे वह धुंध के प्रमुख स्रोत के रूप में पहचानता है, जो ठंड के महीनों में दिल्ली तक पहुँचती है। अधिकारियों का कहना है कि खुले खेतों में फसल अवशेष जलाने को रोकने से वायु में हानिकारक कणों की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आएगी।
दिसंबर‑जनवरी में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है, जिससे स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है। सीएक्यूएम का यह अपील पीक प्रदूषण अवधि से पहले आया है, जिसमें राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों से मौजूदा उत्सर्जन मानकों को लागू करने और किसानों को वैकल्पिक अवशेष प्रबंधन उपाय प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
हालाँकि यह सलाह कानूनी बाध्यता नहीं रखती, सीएक्यूएम ने बताया कि वह अनुपालन की निगरानी करेगा और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को डेटा साझा करेगा, जिससे आगे की नीति कार्रवाई संभव हो सके। एजेंसी ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए वाहन मालिकों, परिवहन ऑपरेटरों और कृषि हितधारकों का सामूहिक सहयोग आवश्यक है।