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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. बीजेपी और समाजवादी पार्टी (SP) दोनों ही एक-दूसरे के विधायकों में सेंधमारी का दावा कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव की अधिसूचना चुनाव आयोग द्वारा जारी की जा चुकी है, जिसके बाद सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर है. 16 अक्टूबर 2026 को होने वाले इस मतदान में सबसे बड़ा घमासान 10वीं सीट को लेकर छिड़ गया है. संख्या बल के हिसाब से बीजेपी (NDA) की सात और समाजवादी पार्टी (सपा) की दो सीटों पर जीत तय मानी जा रही है, लेकिन अंतिम बची सीट के लिए दोनों खेमों में जबरदस्त शह-मात का खेल शुरू हो चुका है.
सीटों और वोटों का पूरा गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा स्थिति और रिक्त सीटों के कारण अधिकतम 395 वोट पड़ सकते हैं. नियमों के मुताबिक, एक उम्मीदवार को पहली वरीयता के आधार पर सीधे जीतने के लिए 37 विधायकों के वोटों की आवश्यकता है.
भारतीय जनता पार्टी (NDA): बीजेपी के पास 7 सीटें आसानी से जीतने के बाद अपनी 8वीं सीट को सुरक्षित करने के लिए करीब 33 अतिरिक्त वोट हैं, लेकिन जीत सुनिश्चित करने के लिए उसे 4 और विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है.
समाजवादी पार्टी: सपा के पास अपने दो उम्मीदवार जिताने के बाद करीब 25 वोट अतिरिक्त (सरप्लस) बच रहे हैं. ऐसे में अपने तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए सपा को कम से कम 12 से 14 अतिरिक्त विधायकों का जुगाड़ करना होगा.
सीटों और वोटों का पूरा गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा स्थिति और रिक्त सीटों के कारण अधिकतम 395 वोट पड़ सकते हैं. नियमों के मुताबिक, एक उम्मीदवार को पहली वरीयता के आधार पर सीधे जीतने के लिए 37 विधायकों के वोटों की आवश्यकता है.
भारतीय जनता पार्टी (NDA): बीजेपी के पास 7 सीटें आसानी से जीतने के बाद अपनी 8वीं सीट को सुरक्षित करने के लिए करीब 33 अतिरिक्त वोट हैं, लेकिन जीत सुनिश्चित करने के लिए उसे 4 और विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है.
समाजवादी पार्टी: सपा के पास अपने दो उम्मीदवार जिताने के बाद करीब 25 वोट अतिरिक्त (सरप्लस) बच रहे हैं. ऐसे में अपने तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए सपा को कम से कम 12 से 14 अतिरिक्त विधायकों का जुगाड़ करना होगा.