📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NASA/GSFC, MODIS Rapid Response Team, Jacques Desc
मौसम
2026 की सर्दी शुरू, सायकोनिक तूफ़ान से 12 राज्यों में बारिश
✍️ Dynamite News
🗓 07 नव. 2026, 07:12 AM
👁 14
देश भर में तापमान में गिरावट ने 2026 की सर्दी की शुरुआत को चिह्नित किया है, जबकि सायकोनिक तूफ़ान अगले कुछ दिनों में 12 राज्यों में बारिश लाएगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों और हिमालयी foothills में दिन के समय तापमान में स्पष्ट गिरावट दर्ज की, जिससे 2026 की सर्दी की आधिकारिक शुरुआत का संकेत मिला। दिल्ली और लखनऊ में न्यूनतम तापमान 8°C तक गिरा, जबकि शिमला जैसे हिल स्टेशन पर तापमान 2°C के करीब रहा।
इसी दौरान, बंगाल की खाड़ी में विकसित एक कम दबाव वाला प्रणाली तेज़ी से सायकोनिक तूफ़ान में बदल गई। IMD ने इस तूफ़ान को उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए 12 राज्यों—ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु—में अगले 72 घंटों में मध्यम से भारी वर्षा लाने की भविष्यवाणी की है।
प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से सतर्क रहने, निचले इलाकों से बचने और जलभराव से बचाव के उपाय करने की अपील की गई है। वर्षा कृषि क्षेत्रों के लिए प्री‑मानसून नमी प्रदान कर सकती है, परन्तु जलजमाव वाले जिलों में सड़क व रेल यातायात में बाधा की संभावना है।
शुरुआती सर्दी की ठंड और इस सायकोनिक तूफ़ान के साथ बारिश का संयोजन इस समय के लिए असामान्य माना जा रहा है, जिससे वैज्ञानिक इस प्रणाली की आगे की तीव्रता को नज़र में रख रहे हैं।
इसी दौरान, बंगाल की खाड़ी में विकसित एक कम दबाव वाला प्रणाली तेज़ी से सायकोनिक तूफ़ान में बदल गई। IMD ने इस तूफ़ान को उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए 12 राज्यों—ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु—में अगले 72 घंटों में मध्यम से भारी वर्षा लाने की भविष्यवाणी की है।
प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से सतर्क रहने, निचले इलाकों से बचने और जलभराव से बचाव के उपाय करने की अपील की गई है। वर्षा कृषि क्षेत्रों के लिए प्री‑मानसून नमी प्रदान कर सकती है, परन्तु जलजमाव वाले जिलों में सड़क व रेल यातायात में बाधा की संभावना है।
शुरुआती सर्दी की ठंड और इस सायकोनिक तूफ़ान के साथ बारिश का संयोजन इस समय के लिए असामान्य माना जा रहा है, जिससे वैज्ञानिक इस प्रणाली की आगे की तीव्रता को नज़र में रख रहे हैं।