📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NASA Earth Observatory image created by Jesse Alle
टेक्नोलॉजी
अमेरिकी कोर्ट ने एआई प्रशिक्षण में गीतों के उपयोग पर फेयर यूज़ पर विचार, भारत ने लाइसेंसिंग प्रस्ताव
✍️ MediaNama
🗓 23 अक्टू. 2026, 04:34 AM
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अमेरिकी फेडरल कोर्ट एआई को गीतों के बोल से प्रशिक्षित करने को फेयर यूज़ मानने पर विचार कर रहा है, जबकि भारत इस सामग्री के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग नियम पर विचार कर रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के नाइन्थ सर्किट अपीले कोर्ट ने एक कॉपीराइट विवाद को सुना है, जिसमें यह तय किया जा रहा है कि एआई कंपनियों द्वारा गीतों के बोल को प्रशिक्षण डेटा के रूप में उपयोग करना फेयर यूज़ के तहत वैध है या नहीं। इस मामले में संगीत प्रकाशकों के एक गठबंधन ने कई एआई फर्मों पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध गीतों को स्क्रैप करके भाषा मॉडल को सुधारने के आरोप लगाए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का फैसला राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल कायम कर सकता है, जिससे एआई कंपनियों को कॉपीराइटेड टेक्स्ट को संभालने के तरीके बदलने पड़ सकते हैं। यदि प्रकाशकों के पक्ष में फैसला होता है तो एआई डेवलपर्स को लाइसेंस लेना या डेटा संग्रह विधियों को पुनः डिजाइन करना पड़ेगा, जबकि फेयर यूज़ के पक्ष में फैसला मौजूदा प्रथाओं को बरकरार रखेगा।
इसी बीच, भारत सरकार एक नई नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें जनरेटिव एआई टूल्स को प्रशिक्षित करने हेतु किसी भी कॉपीराइटेड सामग्री के उपयोग पर अनिवार्य लाइसेंसिंग की मांग की गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह प्रस्ताव संगीतकारों और गीतकारों के लिए पारदर्शी रॉयल्टी प्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से पेश किया है।
दोनों देशों की उद्योग संगठनों ने अपनी-अपनी चिंताएँ जताई हैं। अमेरिकी टेक कंपनियों ने कहा है कि कड़ी लाइसेंसिंग नवाचार को बाधित कर सकती है, जबकि भारतीय संगीत संघ इस कदम को डिजिटल युग में कलाकारों की आय की सुरक्षा के रूप में सराह रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का फैसला राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल कायम कर सकता है, जिससे एआई कंपनियों को कॉपीराइटेड टेक्स्ट को संभालने के तरीके बदलने पड़ सकते हैं। यदि प्रकाशकों के पक्ष में फैसला होता है तो एआई डेवलपर्स को लाइसेंस लेना या डेटा संग्रह विधियों को पुनः डिजाइन करना पड़ेगा, जबकि फेयर यूज़ के पक्ष में फैसला मौजूदा प्रथाओं को बरकरार रखेगा।
इसी बीच, भारत सरकार एक नई नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें जनरेटिव एआई टूल्स को प्रशिक्षित करने हेतु किसी भी कॉपीराइटेड सामग्री के उपयोग पर अनिवार्य लाइसेंसिंग की मांग की गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह प्रस्ताव संगीतकारों और गीतकारों के लिए पारदर्शी रॉयल्टी प्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से पेश किया है।
दोनों देशों की उद्योग संगठनों ने अपनी-अपनी चिंताएँ जताई हैं। अमेरिकी टेक कंपनियों ने कहा है कि कड़ी लाइसेंसिंग नवाचार को बाधित कर सकती है, जबकि भारतीय संगीत संघ इस कदम को डिजिटल युग में कलाकारों की आय की सुरक्षा के रूप में सराह रहे हैं।