🔥 ट्रेंडिंग विर्दी के पवित्र वन के अवशेषों में गाँ... गुज़रते 66% कीमतों के साथ असगाव बन गया... नागालैंड बाढ़ में घायल 53 साल की हाथी... असम सीएम ने इम्फाल‑गुवाहाटी बस सेवा के... न्यू मकन में 52वां लेफ्टिनेंट एच. बोसि... मणिपुर में मीरा बाई चाणु व ग्लासगो कॉम...
23 अग. 2026
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
त्रिपुरा हाई कोर्ट ने कहा बाल‑देखभाल अधिकार अनिवार्य नहीं, हर अनुरोध की जांच आवश्यक
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sabuj Arjo
स्थानीय

त्रिपुरा हाई कोर्ट ने कहा बाल‑देखभाल अधिकार अनिवार्य नहीं, हर अनुरोध की जांच आवश्यक

✍️ The Times of India 🗓 23 अग. 2026, 01:48 AM 👁 7
शेयर करें: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

त्रिपुरा हाई कोर्ट ने कहा कि बाल‑देखभाल का कानूनी अधिकार अनिवार्य नहीं है; प्रत्येक अनुरोध की व्यक्तिगत रूप से जांच की जानी चाहिए।

त्रिपुरा हाई कोर्ट ने हालिया फैसले में कहा कि बाल‑देखभाल के लिये कानूनी प्रावधान अनिवार्य अधिकार नहीं देता। न्यायालय ने बताया कि बाल‑देखभाल का महत्व तो मान्यता है, पर बिना जाँच‑परख के यह अधिकार स्वचालित नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य‑सहायता प्राप्त बाल‑देखभाल सेवाओं के लिये हर आवेदन को उसकी विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए, जिसमें आवेदक की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखा जाए। यह कहा गया कि सर्वत्र लागू करने से सार्वजनिक कल्याण प्रणाली पर बोझ बढ़ सकता है और समान वितरण में बाधा आ सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय कल्याण योजनाओं में केस‑बाय‑केस मूल्यांकन के सिद्धांत को सुदृढ़ करता है, जिससे लाभ वास्तविक रूप से पात्र लोगों तक पहुँच सके। अब अधिकारियों को अदालत के निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया के लिये स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की अपेक्षा है।

यह आदेश त्रिपुरा भर में उन परिवारों को प्रभावित करेगा जो बाल‑देखभाल हेतु सरकारी सहायता चाहते हैं, और उन्हें अपनी पात्रता सिद्ध करने हेतु विस्तृत दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी।
📲Get App