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तेलंगाना संपादकीय: खनन कानून में राज्य अधिकारों की रक्षा की मांग
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mpamidimarthi
राजनीति

तेलंगाना संपादकीय: खनन कानून में राज्य अधिकारों की रक्षा की मांग

✍️ Telangana Today 🗓 01 सित. 2026, 03:31 AM 👁 42
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तेलंगाना टुडे के एक संपादकीय में कहा गया है कि खनन कानून में किए जा रहे सुधारों को राज्य के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, केंद्र के अधिक नियंत्रण से बचना चाहिए।

तेलंगाना टुडे के नवीनतम संपादकीय में कहा गया है कि राष्ट्रीय खनन कानून में कोई भी संशोधन राज्य की संवैधानिक शक्तियों की रक्षा करना चाहिए। यह बताता है कि खनन परियोजनाएँ अक्सर राज्य सीमाओं को पार करती हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण और राजस्व वितरण के लिए स्थानीय निगरानी आवश्यक है।

संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि केंद्र‑केन्द्रित ढांचा राज्य की स्वायत्तता को कम कर सकता है, खनिज‑सम्पन्न क्षेत्रों की आय में कटौती कर सकता है और स्थानीय समुदायों को निर्णय‑प्रक्रिया से बाहर कर सकता है। यह पिछले ऐसे मामलों का उल्लेख करता है जहाँ राज्य सरकारें खनन अनुबंध और रॉयल्टी के संबंध में केंद्र द्वारा किए गए निर्णयों से असंतुष्ट रही हैं।

इन चिंताओं को दूर करने के लिए संपादकीय ने राज्य मंत्रालयों, उद्योग प्रतिनिधियों और नागरिक समाज को शामिल करते हुए एक परामर्श प्रक्रिया की माँग की है, इससे पहले कि संसद में अंतिम मसौदा पेश किया जाए। यह केंद्र से संविधान में निहित संघीय ढाँचे का सम्मान करने और संतुलित खनन नीति बनाने का आग्रह करता है।

लेख का निष्कर्ष यह है कि राज्य अधिकारों की रक्षा न केवल संघीय सिद्धांतों को कायम रखेगी, बल्कि खनन विकास को सतत, पारदर्शी और उन क्षेत्रों के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक बनाएगी जहाँ संसाधन स्थित हैं।
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