📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Landsat 9 via USGS, processed by User:Chorchapu
विदेश
चाय का कप बचाया पाँच भारतीयों को नेपाल बाढ़ में
✍️ Kanak News Odisha
🗓 31 अग. 2026, 11:36 PM
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एक चाय के कप ने नेपाल की बाढ़ में पाँच भारतीय यात्रियों की जान बचाई, यह खबर कानक न्यूज़ ओडिशा की विशेष रिपोर्ट से मिली।
पूर्वी नेपाल के एक दूरस्थ घाटी में इस सप्ताह की शुरुआत में अचानक बाढ़ आई, जिससे सड़कों का बहाव हो गया और पाँच भारतीय मित्रों का समूह फँस गया, जो ट्रेकिंग पर थे। तेज़ी से बढ़ते पानी ने उन्हें संकरी नदी किनारे के रास्ते पर फँसा दिया, जहाँ से तुरंत बाहर निकलना संभव नहीं था।
कानक न्यूज़ ओडिशा द्वारा एकत्र किए गए गवाहों के अनुसार, समूह ने बाढ़ आने से पहले एक कप चाय साझा की थी। वही कप उनके हाथों में रहा और उन्हें तैरने में मदद मिली, जिससे बचाव दल को उन्हें खोजने का समय मिला।
स्थानीय नेपाली बचाव कर्मियों ने स्वयंसेवकों की मदद से कुछ घंटों में पहुंच कर पाँचों यात्रियों को सुरक्षित स्थान तक ले गया। अधिकारी इस तेज़ प्रतिक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि यह घटना हिमालयी क्षेत्र में मानसून‑प्रेरित बाढ़ की अनिश्चितता को उजागर करती है।
यह घटना ट्रेकर्स को बुनियादी तैयारी, जैसे तैराकी उपकरण साथ रखना और मौसम की चेतावनियों से अवगत रहना, की महत्ता की याद दिलाती है। बचाए गए यात्रियों ने चाय के कप की अप्रत्याशित भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया।
कानक न्यूज़ ओडिशा की विशेष रिपोर्ट ने इस घटना को इस रूप में उजागर किया कि साधारण वस्तुएँ भी जीवन‑रक्षक बन सकती हैं।
कानक न्यूज़ ओडिशा द्वारा एकत्र किए गए गवाहों के अनुसार, समूह ने बाढ़ आने से पहले एक कप चाय साझा की थी। वही कप उनके हाथों में रहा और उन्हें तैरने में मदद मिली, जिससे बचाव दल को उन्हें खोजने का समय मिला।
स्थानीय नेपाली बचाव कर्मियों ने स्वयंसेवकों की मदद से कुछ घंटों में पहुंच कर पाँचों यात्रियों को सुरक्षित स्थान तक ले गया। अधिकारी इस तेज़ प्रतिक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि यह घटना हिमालयी क्षेत्र में मानसून‑प्रेरित बाढ़ की अनिश्चितता को उजागर करती है।
यह घटना ट्रेकर्स को बुनियादी तैयारी, जैसे तैराकी उपकरण साथ रखना और मौसम की चेतावनियों से अवगत रहना, की महत्ता की याद दिलाती है। बचाए गए यात्रियों ने चाय के कप की अप्रत्याशित भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया।
कानक न्यूज़ ओडिशा की विशेष रिपोर्ट ने इस घटना को इस रूप में उजागर किया कि साधारण वस्तुएँ भी जीवन‑रक्षक बन सकती हैं।