📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / J.M.Garg
मौसम
ओडिशा में सातारभाया मंदिर पर समुद्र का तेज़ी से कब्ज़ा
✍️ Kanak News Odisha
🗓 30 अग. 2026, 03:33 PM
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समुद्री जल और तट क्षरण के कारण ओडिशा के सातारभाया मंदिर में पानी घुस गया, जिससे सांस्कृतिक धरोहर को खतरा है।
ओडिशा के बलेश्वर जिले के तट पर स्थित सातारभाया मंदिर अब समुद्र के आगे बढ़ने से आंशिक रूप से डूब गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि हालिया भारी बारिश के दौरान मंदिर के निचले हिस्से में पानी भर गया था और बारिश के बाद भी जल स्तर घटा नहीं।
समुद्र स्तर में वृद्धि और तट क्षरण के तेज़ होने को विशेषज्ञ समुद्र‑तट के क्षरण का मुख्य कारण मानते हैं, जो बंगाल की खाड़ी में हाल के वर्षों में बढ़ा है। राज्य के समुद्री संसाधन विभाग ने बताया कि पिछले दस वर्षों में सातारभाया के तट से कई मीटर जमीन हट गई है, जिससे मंदिर की प्राकृतिक सुरक्षा कमज़ोर हो गई।
इस जलमग्नता से विरासत संरक्षणकर्ताओं में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि निरंतर जल संपर्क से मंदिर की नक्काशी और पूजा स्थल को अपरिवर्तनीय नुकसान हो सकता है। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने आपातकालीन उपायों की जांच शुरू कर दी है, जिसमें अस्थायी रेत की थैलियों से बचाव और संभावित रूप से कलाकृतियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना शामिल है।
सातारभाया मंदिर, जो अपने अनोखे समुद्री पूजा परम्पराओं के लिए जाना जाता है, आसपास के गांवों से तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। इसका खतरा भारत के पूर्वी तट पर जलवायु‑प्रेरित समुद्र‑स्तर वृद्धि के सामने सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा की व्यापक चुनौती को उजागर करता है।
समुद्र स्तर में वृद्धि और तट क्षरण के तेज़ होने को विशेषज्ञ समुद्र‑तट के क्षरण का मुख्य कारण मानते हैं, जो बंगाल की खाड़ी में हाल के वर्षों में बढ़ा है। राज्य के समुद्री संसाधन विभाग ने बताया कि पिछले दस वर्षों में सातारभाया के तट से कई मीटर जमीन हट गई है, जिससे मंदिर की प्राकृतिक सुरक्षा कमज़ोर हो गई।
इस जलमग्नता से विरासत संरक्षणकर्ताओं में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि निरंतर जल संपर्क से मंदिर की नक्काशी और पूजा स्थल को अपरिवर्तनीय नुकसान हो सकता है। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने आपातकालीन उपायों की जांच शुरू कर दी है, जिसमें अस्थायी रेत की थैलियों से बचाव और संभावित रूप से कलाकृतियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना शामिल है।
सातारभाया मंदिर, जो अपने अनोखे समुद्री पूजा परम्पराओं के लिए जाना जाता है, आसपास के गांवों से तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। इसका खतरा भारत के पूर्वी तट पर जलवायु‑प्रेरित समुद्र‑स्तर वृद्धि के सामने सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा की व्यापक चुनौती को उजागर करता है।