📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
रक्षा
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 7 साल की सेवा के बाद अमान्य निकाले गए जवान की विधवा को पेंशन का हक दिया
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 18 सित. 2026, 09:31 AM
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सात साल की सेवा के बाद अमान्य घोषित होकर बाहर किए गए जवान की विधवा को 42 साल बाद पेंशन मिलनी चाहिए।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया, जिसमें सात साल की सेवा के बाद "अमान्य" घोषित होकर बाहर किए गए जवान की विधवा को पेंशन मिलने का मार्ग साफ किया गया। यह सैनिक 1980 के दशक की शुरुआत में सेना से निकाला गया था, और उसकी विधवा को चार दशकों से अधिक समय तक पेंशन से वंचित रखा गया।
अदालत ने कहा कि उस समय की सेवा नियमावली के तहत निकासी उचित नहीं थी और विधवा का पेंशन अधिकार अनधिकार रूप से रोका गया था। इसलिए, रक्षा मंत्रालय को पेंशन बकाया और नियमित भुगतान को सैनिक की मृत्यु के दिन से retroactively प्रक्रिया करने का निर्देश दिया गया।
यह फैसला रक्षा परिवारों की लंबी अवधि की शिकायतों को सुलझाने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है और समान मामलों में precedent स्थापित कर सकता है। यह निर्णय जालंधर स्थित हाईकोर्ट से आया है और दिग्गज कल्याण संगठनों द्वारा सराहा गया है।
अदालत ने कहा कि उस समय की सेवा नियमावली के तहत निकासी उचित नहीं थी और विधवा का पेंशन अधिकार अनधिकार रूप से रोका गया था। इसलिए, रक्षा मंत्रालय को पेंशन बकाया और नियमित भुगतान को सैनिक की मृत्यु के दिन से retroactively प्रक्रिया करने का निर्देश दिया गया।
यह फैसला रक्षा परिवारों की लंबी अवधि की शिकायतों को सुलझाने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है और समान मामलों में precedent स्थापित कर सकता है। यह निर्णय जालंधर स्थित हाईकोर्ट से आया है और दिग्गज कल्याण संगठनों द्वारा सराहा गया है।