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नवादा में सफाई व्यवस्था बदहाल: जगह-जगह कूड़े का अंबार और जाम नालियों से लोग परेशान, 'स्वस्थ नवादा' का दावा फेल
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बिहार के नवादा शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रमुख स्थानों पर लगे कचरे के ढेर और जाम नालियों के कारण स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नवादा शहर में इन दिनों सफाई व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। शहर के विभिन्न इलाकों में जगह-जगह कूड़े का अंबार लगा हुआ है और नालियां जाम हैं। बरसात के मौसम में जलजमाव की समस्या ने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में प्रशासन द्वारा किया जाने वाला ‘स्वस्थ नवादा’ का दावा केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है और धरातल पर इसकी स्थिति शून्य है।
शहर के सदर अस्पताल परिसर के आसपास, सब्जी मार्केट, बी.जे. बाजार और स्टेशन रोड जैसे प्रमुख और व्यस्त इलाकों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कचरे का नियमित उठाव न होने के कारण स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। लोगों को मजबूरन गंदे पानी और कचरे के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों के पास फैली गंदगी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
इस बदहाली को लेकर स्थानीय जनता जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है। लोगों का कहना है कि जब शहर के विकास के लिए सरकारी फंड उपलब्ध कराया जाता है और जनप्रतिनिधियों को वेतन व अन्य सुविधाएं मिलती हैं, तो फिर बेहतर सड़क, साफ-सफाई और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं। कुछ सड़कों को छोड़ दें तो शहर की अधिकांश सड़कें जर्जर स्थिति में हैं और बारिश होते ही जलजमाव की स्थिति बन जाती है।
सोशल मीडिया पर शहर की बदहाली की तस्वीरें और वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि लोकतंत्र में बुनियादी सुविधाओं के लिए सवाल पूछना उनका अधिकार है। लोगों ने आह्वान किया है कि केवल सोशल मीडिया पर शिकायत करने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि आम नागरिकों को जागरूक होकर अपनी आवाज उठानी होगी और जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब मांगना होगा। फिलहाल, नवादा की जनता इस बदहाली से मुक्ति और जिम्मेदार अधिकारियों के जागने का इंतजार कर रही है।
शहर के सदर अस्पताल परिसर के आसपास, सब्जी मार्केट, बी.जे. बाजार और स्टेशन रोड जैसे प्रमुख और व्यस्त इलाकों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कचरे का नियमित उठाव न होने के कारण स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। लोगों को मजबूरन गंदे पानी और कचरे के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों के पास फैली गंदगी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
इस बदहाली को लेकर स्थानीय जनता जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है। लोगों का कहना है कि जब शहर के विकास के लिए सरकारी फंड उपलब्ध कराया जाता है और जनप्रतिनिधियों को वेतन व अन्य सुविधाएं मिलती हैं, तो फिर बेहतर सड़क, साफ-सफाई और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं। कुछ सड़कों को छोड़ दें तो शहर की अधिकांश सड़कें जर्जर स्थिति में हैं और बारिश होते ही जलजमाव की स्थिति बन जाती है।
सोशल मीडिया पर शहर की बदहाली की तस्वीरें और वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि लोकतंत्र में बुनियादी सुविधाओं के लिए सवाल पूछना उनका अधिकार है। लोगों ने आह्वान किया है कि केवल सोशल मीडिया पर शिकायत करने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि आम नागरिकों को जागरूक होकर अपनी आवाज उठानी होगी और जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब मांगना होगा। फिलहाल, नवादा की जनता इस बदहाली से मुक्ति और जिम्मेदार अधिकारियों के जागने का इंतजार कर रही है।