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मल्लाह जाति के आरक्षण की मांग को लेकर गरमाया राजनीतिक माहौल: उत्तर प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र से मल्लाह जाती का पुरा समर्थन
महाराष्ट्र से श्री. अनिल दिवाणजी मल्लाव की हुंकार और संजय निषाद को समर्थन
मल्लाह जाति के आरक्षण की मांग को लेकर गरमाया राजनीतिक माहौल: उत्तर प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र से मल्लाह जाती का पुरा समर्थन
देश भर में इन दिनों आरक्षण का मुद्दा काफी गर्माया हुआ है, और इसे संभालना भाजपा सरकार के लिए आसान नहीं रह गया है। एक तरफ एससी-एसटी समुदाय अपने आरक्षण को लेकर सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सवर्ण वर्ग जाति आधारित आरक्षण को समाप्त कर बौद्धिक या मेरिट आधारित व्यवस्था लाने की मांग कर रहा है। इस बीच, उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी के नेताओं के तेवरों ने राजनीतिक गलियारों में और हलचल मचा दी है।
महाराष्ट्र से श्री. अनिल दिवाणजी मल्लाव की हुंकार और संजय निषाद को समर्थन
इसी क्रम में अब महाराष्ट्र से भी मल्लाह जाति के आरक्षण की मांग की जा रही है । भारतीय जनवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष श्री. अनिल दिवाणजी मल्लाव ने पुणे में एक बयान देते हुए जोरदार मांग उठाई है कि जिस प्रकार उत्तर प्रदेश में मल्लाह जाति को आरक्षण दिए जाने का मुद्दा उठाया जा रहा है, ठीक उसी प्रकार महाराष्ट्र में भी मल्लाह जाति को एसटी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग में शामिल किया जाए।
इसके साथ ही, श्री. अनिल दिवाणजी मल्लाव ने घोषणा की है कि निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को उनकी मल्लाह जाति की ओर से पूरा समर्थन और सहयोग मिलेगा। महाराष्ट्र के इन नेताओं के जुड़ने से इस मांग को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई धार मिलती दिख रही है।
गठबंधन सहयोगी निषाद पार्टी के तेवर और राजनीतिक घमासान
उत्तर प्रदेश में एनडीए (NDA) गठबंधन की सहयोगी निषाद पार्टी और मल्लाह समुदाय ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि उन्हें आरक्षण नहीं मिला, तो वे विधानसभा के साथ-साथ विधायकों और सांसदों के आवासों का घेराव करेंगे।
इसी माहौल के बीच, यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और एनडीए के सहयोगी दल निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद का बड़ा बयान सामने आया है। गठबंधन में शामिल होने के बावजूद संजय निषाद ने साफ शब्दों में कहा है कि "जय भीम" वाले अगर आरक्षण ले सकते हैं, तो "जय निषाद राज" वाले भी आरक्षण लेकर रहेंगे।
उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि भाजपा सरकार आरक्षण के मुद्दे पर उनका रास्ता बंद करेगी, तो निषाद पार्टी गठबंधन से स्वतंत्र हो जाएगी और अपने हक के लिए विधानसभा, विधायकों व सांसदों का घेराव करेगी।
बढ़ता राजनीतिक दबाव
उत्तर प्रदेश में एनडीए की सहयोगी दल के इस तीखे रुख के बाद अब महाराष्ट्र से मल्लाह नेतृत्व का खुला समर्थन मिलने से केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। एक तरफ भाजपा अपने गठबंधन सहयोगी को साधने की चुनौती से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण का यह आंदोलन अब राज्यों की सीमाओं को लांघकर राष्ट्रीय रूप लेता दिख रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बढ़ते राजनीतिक दबाव पर क्या रुख अपनाती है।
देश भर में इन दिनों आरक्षण का मुद्दा काफी गर्माया हुआ है, और इसे संभालना भाजपा सरकार के लिए आसान नहीं रह गया है। एक तरफ एससी-एसटी समुदाय अपने आरक्षण को लेकर सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सवर्ण वर्ग जाति आधारित आरक्षण को समाप्त कर बौद्धिक या मेरिट आधारित व्यवस्था लाने की मांग कर रहा है। इस बीच, उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी के नेताओं के तेवरों ने राजनीतिक गलियारों में और हलचल मचा दी है।
महाराष्ट्र से श्री. अनिल दिवाणजी मल्लाव की हुंकार और संजय निषाद को समर्थन
इसी क्रम में अब महाराष्ट्र से भी मल्लाह जाति के आरक्षण की मांग की जा रही है । भारतीय जनवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष श्री. अनिल दिवाणजी मल्लाव ने पुणे में एक बयान देते हुए जोरदार मांग उठाई है कि जिस प्रकार उत्तर प्रदेश में मल्लाह जाति को आरक्षण दिए जाने का मुद्दा उठाया जा रहा है, ठीक उसी प्रकार महाराष्ट्र में भी मल्लाह जाति को एसटी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग में शामिल किया जाए।
इसके साथ ही, श्री. अनिल दिवाणजी मल्लाव ने घोषणा की है कि निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को उनकी मल्लाह जाति की ओर से पूरा समर्थन और सहयोग मिलेगा। महाराष्ट्र के इन नेताओं के जुड़ने से इस मांग को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई धार मिलती दिख रही है।
गठबंधन सहयोगी निषाद पार्टी के तेवर और राजनीतिक घमासान
उत्तर प्रदेश में एनडीए (NDA) गठबंधन की सहयोगी निषाद पार्टी और मल्लाह समुदाय ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि उन्हें आरक्षण नहीं मिला, तो वे विधानसभा के साथ-साथ विधायकों और सांसदों के आवासों का घेराव करेंगे।
इसी माहौल के बीच, यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और एनडीए के सहयोगी दल निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद का बड़ा बयान सामने आया है। गठबंधन में शामिल होने के बावजूद संजय निषाद ने साफ शब्दों में कहा है कि "जय भीम" वाले अगर आरक्षण ले सकते हैं, तो "जय निषाद राज" वाले भी आरक्षण लेकर रहेंगे।
उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि भाजपा सरकार आरक्षण के मुद्दे पर उनका रास्ता बंद करेगी, तो निषाद पार्टी गठबंधन से स्वतंत्र हो जाएगी और अपने हक के लिए विधानसभा, विधायकों व सांसदों का घेराव करेगी।
बढ़ता राजनीतिक दबाव
उत्तर प्रदेश में एनडीए की सहयोगी दल के इस तीखे रुख के बाद अब महाराष्ट्र से मल्लाह नेतृत्व का खुला समर्थन मिलने से केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। एक तरफ भाजपा अपने गठबंधन सहयोगी को साधने की चुनौती से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण का यह आंदोलन अब राज्यों की सीमाओं को लांघकर राष्ट्रीय रूप लेता दिख रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बढ़ते राजनीतिक दबाव पर क्या रुख अपनाती है।