📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
खानपान
महाराष्ट्र के सीएम फडनवीस ने एफडीए को तेल मिलावट रोकने के SOP बनाने का निर्देश
✍️ Mid-Day
🗓 24 अग. 2026, 09:10 PM
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन को खाद्य तेल में मिलावट रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ तैयार करने का आदेश दिया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को खाद्य तेल में मिलावट रोकने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) तैयार करने का निर्देश दिया। यह आदेश उपभोक्ता स्वास्थ्य की सुरक्षा और एक आवश्यक वस्तु के बाजार की पारदर्शिता को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
खराब या सस्ते पदार्थों के साथ मिलाए गए खाद्य तेल की समस्या राज्य में बार‑बार सामने आई है, जिससे उपभोक्ताओं की शिकायतें और निरीक्षण रिपोर्टें बढ़ी हैं। एसओपी के माध्यम से एफडीए परीक्षण मानकों को एकरूप करने, दंड को कड़ा करने और आपूर्ति श्रृंखला में ट्रेसबिलिटी को बेहतर बनाने की योजना बना रहा है।
एफडीए को निर्धारित समय सीमा के भीतर ये प्रक्रियाएँ तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है। अंतिम रूप मिलने के बाद इन्हें तेल निर्माताओं, वितरकों और रिटेलरों तक पहुँचाया जाएगा, तथा अनुपालन की निगरानी के लिए नियमित ऑडिट आयोजित किए जाएंगे।
प्राधिकरण का मानना है कि नई दिशानिर्देशों से घरों में कम गुणवत्ता वाले तेल की आपूर्ति घटेगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा होगी और स्थानीय तेल ब्रांडों में भरोसा पुनः स्थापित होगा।
खराब या सस्ते पदार्थों के साथ मिलाए गए खाद्य तेल की समस्या राज्य में बार‑बार सामने आई है, जिससे उपभोक्ताओं की शिकायतें और निरीक्षण रिपोर्टें बढ़ी हैं। एसओपी के माध्यम से एफडीए परीक्षण मानकों को एकरूप करने, दंड को कड़ा करने और आपूर्ति श्रृंखला में ट्रेसबिलिटी को बेहतर बनाने की योजना बना रहा है।
एफडीए को निर्धारित समय सीमा के भीतर ये प्रक्रियाएँ तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है। अंतिम रूप मिलने के बाद इन्हें तेल निर्माताओं, वितरकों और रिटेलरों तक पहुँचाया जाएगा, तथा अनुपालन की निगरानी के लिए नियमित ऑडिट आयोजित किए जाएंगे।
प्राधिकरण का मानना है कि नई दिशानिर्देशों से घरों में कम गुणवत्ता वाले तेल की आपूर्ति घटेगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा होगी और स्थानीय तेल ब्रांडों में भरोसा पुनः स्थापित होगा।