📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rtseinstein
राजनीति
मद्रास हाई कोर्ट ने एम.के. स्टालिन की कोलथुर से निर्वाचित घोषित करने की याचिका खारिज की
✍️ The Hindu
🗓 03 सित. 2026, 08:36 PM
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मद्रास हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की कोलथुर विधानसभा सीट से निर्वाचित घोषित करने की याचिका को खारिज कर दिया है।
मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वे कोलथुर विधानसभा सीट से निर्वाचित घोषित होने की न्यायिक पुष्टि चाहते थे। इस याचिका को बिना किसी आदेश के अस्वीकार कर कोर्ट ने मौजूदा चुनाव परिणाम को बरकरार रखा।
स्टालिन, जो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख हैं, ने चुनाव आयोग के परिणाम को चुनौती देने के बाद इस मामले को अदालत में लाया था। कोर्ट के फैसले ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए आधिकारिक गणना को मान्यता दी और सीट की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि चुनावी परिणामों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा सीमित है, विशेषकर जब विधायी प्रक्रिया समाप्त हो चुकी हो। यह निर्णय चुनावी परिणामों की अंतिमता को सुदृढ़ करेगा और डीएमके को अन्य राजनीतिक या प्रशासनिक उपायों की ओर बढ़ने का संकेत देगा।
अंत में, कोर्ट ने संकेत दिया कि कोलथुर परिणाम से संबंधित आगे की कोई भी विवादित स्थिति अब सुप्रीम कोर्ट जैसे उच्चतम अपीलीय मंचों के माध्यम से ही सुलझाई जा सकती है, न कि हाई कोर्ट में नई याचिकाओं के द्वारा।
स्टालिन, जो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख हैं, ने चुनाव आयोग के परिणाम को चुनौती देने के बाद इस मामले को अदालत में लाया था। कोर्ट के फैसले ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए आधिकारिक गणना को मान्यता दी और सीट की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि चुनावी परिणामों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा सीमित है, विशेषकर जब विधायी प्रक्रिया समाप्त हो चुकी हो। यह निर्णय चुनावी परिणामों की अंतिमता को सुदृढ़ करेगा और डीएमके को अन्य राजनीतिक या प्रशासनिक उपायों की ओर बढ़ने का संकेत देगा।
अंत में, कोर्ट ने संकेत दिया कि कोलथुर परिणाम से संबंधित आगे की कोई भी विवादित स्थिति अब सुप्रीम कोर्ट जैसे उच्चतम अपीलीय मंचों के माध्यम से ही सुलझाई जा सकती है, न कि हाई कोर्ट में नई याचिकाओं के द्वारा।