कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक
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कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में कलेक्टर ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी गर्भवती माताओं का प्रथम तिमाही में पंजीयन सुनिश्चित किया जाए तथा गर्भावस्था के दौरान निर्धारित चारों प्रसव पूर्व जांचें अनिवार्य रूप से कराई जाएं। हाई रिस्क गर्भवती माताओं की पूर्व से पहचान कर उनकी वर्थ वेटिंग लिस्ट तैयार की जाए तथा ऐसी माताओं का संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के लिए समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक माह की 09 एवं 25 तारीख को स्वास्थ्य संस्थाओं में पंजीकृत गर्भवती माताओं की जांच एवं टीकाकरण अनिवार्य रूप से कराया जाए। प्रसव हेतु चिन्हित अस्पतालों में नवजात शिशुओं के आधार कार्ड बनाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना, प्रसूती सहायता योजना एवं प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत हितग्राहियों को मिलने वाला अनुदान किसी भी स्थिति में लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने आगामी 15 दिवसों में होने वाले प्रसव की सूची संबंधित बीएमओ के पास रखने तथा उसकी नियमित मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने सभी बीएमओ एवं सीडीपीओ को निर्देश दिए कि वे प्रतिमाह संयुक्त बैठक आयोजित कर गर्भवती माताओं की सूची का अनिवार्य रूप से मिलान करें, जिससे किसी भी पात्र गर्भवती महिला का पंजीयन अथवा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी छूटने न पाए। साथ ही गृह आधारित नवजात शिशुओं की देखभाल की नियमित मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए गए।
एसएनसीयू में नवजात शिशुओं की मृत्यु के कारणों की होगी समीक्षा
कलेक्टर ने एसएनसीयू में मृत्यु दर कम करने के लिए प्रत्येक नवजात शिशु की मृत्यु के कारणों की जांच करने तथा जांच में सामने आने वाले कारणों के आधार पर भविष्य में आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने एनआरसी में भर्ती होने वाले बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के बाद भी उनकी नियमित मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि स्वस्थ होने के बाद बच्चे दोबारा कुपोषण की श्रेणी में न जाएं। बैठक में गर्भवती माताओं के शत-प्रतिशत ऑनलाइन पंजीयन की भी समीक्षा की गई। शत-प्रतिशत ऑनलाइन पंजीयन नहीं होने पर बीएमओ बुढ़ार तथा अर्बन शहडोल की परियोजना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिए गए।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा, सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ, डीपीओ श्री अखिलेश मिश्रा, बीएमओ, सीडीपीओ एवं प्रबंधक एनएचएम सहित चिकित्सा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी गर्भवती माताओं का प्रथम तिमाही में पंजीयन सुनिश्चित किया जाए तथा गर्भावस्था के दौरान निर्धारित चारों प्रसव पूर्व जांचें अनिवार्य रूप से कराई जाएं। हाई रिस्क गर्भवती माताओं की पूर्व से पहचान कर उनकी वर्थ वेटिंग लिस्ट तैयार की जाए तथा ऐसी माताओं का संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के लिए समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक माह की 09 एवं 25 तारीख को स्वास्थ्य संस्थाओं में पंजीकृत गर्भवती माताओं की जांच एवं टीकाकरण अनिवार्य रूप से कराया जाए। प्रसव हेतु चिन्हित अस्पतालों में नवजात शिशुओं के आधार कार्ड बनाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना, प्रसूती सहायता योजना एवं प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत हितग्राहियों को मिलने वाला अनुदान किसी भी स्थिति में लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने आगामी 15 दिवसों में होने वाले प्रसव की सूची संबंधित बीएमओ के पास रखने तथा उसकी नियमित मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने सभी बीएमओ एवं सीडीपीओ को निर्देश दिए कि वे प्रतिमाह संयुक्त बैठक आयोजित कर गर्भवती माताओं की सूची का अनिवार्य रूप से मिलान करें, जिससे किसी भी पात्र गर्भवती महिला का पंजीयन अथवा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी छूटने न पाए। साथ ही गृह आधारित नवजात शिशुओं की देखभाल की नियमित मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए गए।
एसएनसीयू में नवजात शिशुओं की मृत्यु के कारणों की होगी समीक्षा
कलेक्टर ने एसएनसीयू में मृत्यु दर कम करने के लिए प्रत्येक नवजात शिशु की मृत्यु के कारणों की जांच करने तथा जांच में सामने आने वाले कारणों के आधार पर भविष्य में आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने एनआरसी में भर्ती होने वाले बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के बाद भी उनकी नियमित मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि स्वस्थ होने के बाद बच्चे दोबारा कुपोषण की श्रेणी में न जाएं। बैठक में गर्भवती माताओं के शत-प्रतिशत ऑनलाइन पंजीयन की भी समीक्षा की गई। शत-प्रतिशत ऑनलाइन पंजीयन नहीं होने पर बीएमओ बुढ़ार तथा अर्बन शहडोल की परियोजना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिए गए।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा, सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ, डीपीओ श्री अखिलेश मिश्रा, बीएमओ, सीडीपीओ एवं प्रबंधक एनएचएम सहित चिकित्सा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।