📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
अपराध
जबलपुर हाईकोर्ट ने फर्जी वकील अतिथि शिक्षक पर 300 से अधिक जेल मामलों के लिए जांच का आदेश दिया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 02 सित. 2026, 09:35 PM
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जबलपुर हाईकोर्ट ने अतिथि शिक्षक नीरज कुमार साकेत को फर्जी वकील बनकर जेलों से 300 से अधिक वकालतनामे लेने के आरोप में जांच का आदेश दिया है, इसे गंभीर अनियमितता माना गया है।
जबलपुर हाईकोर्ट ने सोमवार को अतिथि शिक्षक नीरज कुमार साकेत के खिलाफ विस्तृत जांच का आदेश दिया, जिन पर फर्जी वकील बनकर विभिन्न जेलों के 300 से अधिक वकालतनामे लेने का आरोप है।
कोर्ट ने इस कार्य को "प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता" कहा और राज्य विधि विभाग को मामले की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, साकेत द्वारा दावा किए गए किसी भी वकालत लाइसेंस या बार काउंसिल पंजीकरण की सत्यता भी जांचे जाने को कहा गया।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो साकेत पर वकील अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत पहचान चोरी व धोखाधड़ी के आरोप लग सकते हैं। जांच यह भी देखेगी कि क्या किसी कैदी को अयोग्य प्रतिनिधित्व से नुकसान हुआ है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा घटता है और बिना योग्यता के कानूनी सेवाएँ देने वालों की कड़ी निगरानी की जरूरत है। हाईकोर्ट ने आगे की हानि रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया।
जांच को निर्धारित समय सीमा के भीतर समाप्त करने का निर्देश दिया गया है, जिसके बाद निष्कर्षों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने इस कार्य को "प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता" कहा और राज्य विधि विभाग को मामले की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, साकेत द्वारा दावा किए गए किसी भी वकालत लाइसेंस या बार काउंसिल पंजीकरण की सत्यता भी जांचे जाने को कहा गया।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो साकेत पर वकील अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत पहचान चोरी व धोखाधड़ी के आरोप लग सकते हैं। जांच यह भी देखेगी कि क्या किसी कैदी को अयोग्य प्रतिनिधित्व से नुकसान हुआ है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा घटता है और बिना योग्यता के कानूनी सेवाएँ देने वालों की कड़ी निगरानी की जरूरत है। हाईकोर्ट ने आगे की हानि रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया।
जांच को निर्धारित समय सीमा के भीतर समाप्त करने का निर्देश दिया गया है, जिसके बाद निष्कर्षों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।