📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of External Affairs
विदेश
MEA ने यूएन से कहा: जम्मू-कश्मीर व लद्दाख को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार दिखाएँ
✍️ livemint.com
🗓 06 सित. 2026, 09:47 PM
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विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र को कहा कि यूएन में प्रस्तुत किसी भी मानचित्र में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।
नई दिल्ली – विदेश मंत्रालय (MEA) ने संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख के किसी भी मानचित्र को यूएन में भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। मंत्रालय ने बताया कि प्रस्ताव में इन क्षेत्रों की सीमाओं को लेकर भारत की संप्रभुता को अनदेखा किया गया है और यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर कर सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव को कुछ देशों ने "मानचित्र को सही करने" के लिए पेश किया था, जिसमें विवादित सीमाओं को हटाने की मांग थी। भारत ने अपने संविधान और कानूनी ढाँचे के तहत जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख की सीमाओं को परिभाषित किया है और कहा कि इनको सभी आधिकारिक दस्तावेज़ों और मंचों में सम्मानित किया जाना चाहिए।
MEA के प्रवक्ता ने कहा कि भारत यूएन के साथ कूटनीतिक संवाद जारी रखेगा ताकि भविष्य में सभी यूएन प्रकाशनों और कार्यवाही में भारत का आधिकारिक मानचित्र उपयोग हो। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार का अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में बदलाव संप्रभु क्षेत्रों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन माना जा सकता है।
यह बयान वैश्विक मंचों पर मानचित्र प्रतिनिधित्व को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता के बीच आया है, जहाँ कई देशों ने पहले भारत के दावों को चुनौती दी थी। विदेश मंत्रालय की इस सख्त स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली विश्व स्तर पर अपने क्षेत्रीय दावों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है।
संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव को कुछ देशों ने "मानचित्र को सही करने" के लिए पेश किया था, जिसमें विवादित सीमाओं को हटाने की मांग थी। भारत ने अपने संविधान और कानूनी ढाँचे के तहत जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख की सीमाओं को परिभाषित किया है और कहा कि इनको सभी आधिकारिक दस्तावेज़ों और मंचों में सम्मानित किया जाना चाहिए।
MEA के प्रवक्ता ने कहा कि भारत यूएन के साथ कूटनीतिक संवाद जारी रखेगा ताकि भविष्य में सभी यूएन प्रकाशनों और कार्यवाही में भारत का आधिकारिक मानचित्र उपयोग हो। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार का अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में बदलाव संप्रभु क्षेत्रों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन माना जा सकता है।
यह बयान वैश्विक मंचों पर मानचित्र प्रतिनिधित्व को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता के बीच आया है, जहाँ कई देशों ने पहले भारत के दावों को चुनौती दी थी। विदेश मंत्रालय की इस सख्त स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली विश्व स्तर पर अपने क्षेत्रीय दावों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है।