📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pokemonprime
देश
कोर्ट ने कहा, वरिष्ठ नागरिक पुत्र को 93 वर्षीय माँ की इच्छा के विरुद्ध घर नहीं ले सकता
✍️ Live Law
🗓 24 अग. 2026, 07:34 PM
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कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक होने से पुत्र को अपनी 93 साल की माँ की असहमति पर घर में रहने का अधिकार नहीं मिलता।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पुत्र का वरिष्ठ नागरिक होना उसे अपनी 93‑साल की माँ की स्पष्ट असहमति पर पारिवारिक घर में रहने का अधिकार नहीं देता। इस फैसले में स्पष्ट किया गया कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानून में दी गई सुविधाएँ कल्याण संबंधी हैं, न कि ऐसी संपत्ति अधिकार जो वरिष्ठ की अपनी इच्छा को नज़रअंदाज़ कर दें।
लाइव लॉ द्वारा रिपोर्ट किए गए इस मामले में माँ ने अपने घर में पुत्र को बाहर निकालने की मांग की। पुत्र ने यह तर्क दिया कि वरिष्ठ नागरिक होने के कारण उसे रहने का अधिकार है, पर कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर माँ के रहने के अधिकार को प्राथमिकता दी।
कोर्ट का यह निर्णय दर्शाता है कि संपत्ति विवादों में स्वामित्व, सहमति और रहने वाले की अधिकारों को प्राथमिकता दी जाती है, न कि उम्र‑आधारित विशेषाधिकारों को। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश भर में समान पारिवारिक विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
लाइव लॉ द्वारा रिपोर्ट किए गए इस मामले में माँ ने अपने घर में पुत्र को बाहर निकालने की मांग की। पुत्र ने यह तर्क दिया कि वरिष्ठ नागरिक होने के कारण उसे रहने का अधिकार है, पर कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर माँ के रहने के अधिकार को प्राथमिकता दी।
कोर्ट का यह निर्णय दर्शाता है कि संपत्ति विवादों में स्वामित्व, सहमति और रहने वाले की अधिकारों को प्राथमिकता दी जाती है, न कि उम्र‑आधारित विशेषाधिकारों को। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश भर में समान पारिवारिक विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।