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07 नव. 2026•
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बैरिया में गंगा-घाघरा के कटान का होगा वैज्ञानिक अध्ययन, IIT पुणे की टीम करेगी निरीक्षण।

✍️ रिपोर्टर: ANAND KUMAR PANDEY 🗓 07 नव. 2026, 07:38 AM 👁 9
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दीपावली के बाद विशेषज्ञों की टीम कटान प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। प्रस्तावित अध्ययन और कटानरोधी परियोजना के दायरे में गोपालनगर, वशिष्ठनगर, मानगढ़, शिवाल मठिया और शिवपुर कपूर दियर गांवों को शामिल किया गया है।

बलिया: बैरिया तहसील क्षेत्र में गंगा और घाघरा (सरयू) नदी के कटान से प्रभावित गांवों, घरों और कृषि भूमि को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। कटान की समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब IIT पुणे के विशेषज्ञ वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे।

इस संबंध में पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के पुत्र डॉ. विपेन्द्र सिंह ने 5 नवंबर को लखनऊ में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दियरांचल में लगातार बढ़ रहे नदी कटान और उससे प्रभावित लोगों की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया।

डॉ. सिंह के साथ हुई चर्चा के बाद प्रमुख सचिव ने सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में कटान की समस्या के स्थायी समाधान के लिए IIT पुणे के विशेषज्ञों से आधुनिक तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक अध्ययन कराने का निर्णय लिया गया।

दीपावली के बाद विशेषज्ञों की टीम कटान प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। प्रस्तावित अध्ययन और कटानरोधी परियोजना के दायरे में गोपालनगर, वशिष्ठनगर, मानगढ़, शिवाल मठिया और शिवपुर कपूर दियर गांवों को शामिल किया गया है।

डॉ. विपेन्द्र सिंह ने बताया कि गंगा और सरयू नदी के कटान के कारण हजारों परिवारों के सामने विस्थापन और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कई स्थानों पर नदी आबादी के बेहद करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर प्रभावी और स्थायी कटानरोधी कार्य कराना बेहद जरूरी है।

उन्होंने प्रमुख सचिव अनिल गर्ग का इस पहल के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दियरांचल को कटान से बचाने की लड़ाई में वह प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहेंगे।

अब क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि IIT पुणे के वैज्ञानिक अध्ययन के बाद गंगा-घाघरा के कटान से बचाव के लिए ठोस और दीर्घकालिक योजना तैयार हो सकेगी।

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