📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / David Brossard
राजनीति
भरणपुर मेयर चुनाव में बहुमत न होने के बावजूद भाजपा ने अनुराधा सिंह को चेहरा बनाया
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 16 सित. 2026, 08:30 AM
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भरणपुर मेयर चुनाव में भाजपा अनुराधा सिंह को अपना चेहरा बना रही है, जबकि बहुमत से दूर है; 36 निर्दलीय पार्षदों का रुख निर्णायक माना जा रहा है।
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में भरतपुर में मेयर पद के लिए बहुमत अभी स्पष्ट नहीं है। भाजपा ने अनुराधा सिंह को अपना चेहरा बनाने का इरादा जताया है, जबकि पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 36 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन ही इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इन स्वतंत्र प्रतिनिधियों की स्थिति और संभावित क्रॉस‑वोटिंग पर निकटता से नज़र रखी जा रही है।
विश्लेषकों ने कहा कि यह कदम fragmented वोटों को एकत्रित करने और मतदाताओं के सामने एकजुट छवि पेश करने की कोशिश है। भरतपुर में परिणाम यह संकेत दे सकता है कि राज्य के शहरी निकायों में क्षेत्रीय दल और स्वतंत्र पार्षद कितनी शक्ति रखते हैं।
नगर निगम चुनाव आयोग ने अभी तक अंतिम उम्मीदवार सूची जारी नहीं की है, पर स्रोतों ने बताया कि अनुराधा सिंह को उच्च दृश्यता वाले अभियान, रैलियों और स्वतंत्र वार्ड प्रतिनिधियों से संपर्क के लिए तैयार किया जा रहा है।
राजनीतिक दलों के सभी प्रमुख खिलाड़ी इस विकास को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि भरतपुर में भाजपा की चाल भविष्य में राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक मिसाल बन सकती है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 36 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन ही इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इन स्वतंत्र प्रतिनिधियों की स्थिति और संभावित क्रॉस‑वोटिंग पर निकटता से नज़र रखी जा रही है।
विश्लेषकों ने कहा कि यह कदम fragmented वोटों को एकत्रित करने और मतदाताओं के सामने एकजुट छवि पेश करने की कोशिश है। भरतपुर में परिणाम यह संकेत दे सकता है कि राज्य के शहरी निकायों में क्षेत्रीय दल और स्वतंत्र पार्षद कितनी शक्ति रखते हैं।
नगर निगम चुनाव आयोग ने अभी तक अंतिम उम्मीदवार सूची जारी नहीं की है, पर स्रोतों ने बताया कि अनुराधा सिंह को उच्च दृश्यता वाले अभियान, रैलियों और स्वतंत्र वार्ड प्रतिनिधियों से संपर्क के लिए तैयार किया जा रहा है।
राजनीतिक दलों के सभी प्रमुख खिलाड़ी इस विकास को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि भरतपुर में भाजपा की चाल भविष्य में राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक मिसाल बन सकती है।