📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / ArmouredCyborg
राजनीति
बीजेपी ने राहुल गांधी के ख़र्गे के खिलाफ दलित अपमान के आरोप को खारिज किया
✍️ Hindustan Times
🗓 30 अग. 2026, 01:48 AM
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बीजेपी ने राहुल गांधी के यह आरोप को खारिज किया कि कांग्रेस के नेता मलिकरजुन ख़र्गे ने हल्द्वानी में दलितों के शुद्धिकरण समारोह में उनका अपमान किया।
नई दिल्ली – भाजपा ने मंगलवार को राहुल गांधी द्वारा किए गए इस आरोप को खारिज कर दिया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मलिकरजुन ख़र्गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित दलित शुद्धिकरण समारोह के दौरान उपस्थित दलितों को अपमानजनक टिप्पणी की। गांधी ने इस मुद्दे को सार्वजनिक सभा में उठाते हुए कहा कि यह टिप्पणी समुदाय को नीचा दिखाने के इरादे से की गई थी।
भाजपा प्रवक्ता अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह आरोप निराधार और राजनीतिक उद्देश्य से किया गया है, और ऐसे किसी अपमान के कोई प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं का सम्मान करती है और विरोधियों से अपील की कि वे ऐसी गलत जानकारी न फैलाईँ जो सामाजिक तनाव को बढ़ा सके।
शुद्धिकरण समारोह स्थानीय दलित कल्याण समूह द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें समुदाय को आशीर्वाद देने के लिए पारम्परिक रीति‑रिवाजों का पालन किया गया। कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के समाप्त हुआ, पर इस विवाद ने दलित वोटों के लिए दोनो पार्टियों के बीच चल रहे प्रतिस्पर्धा को फिर से उजागर किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दलित वर्ग को आकर्षित करने की दोनों पार्टियों की रणनीति को दर्शाती है, जहाँ प्रत्येक पार्टी खुद को समुदाय के हितों की रक्षा करने वाला प्रस्तुत कर रही है।
भाजपा प्रवक्ता अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह आरोप निराधार और राजनीतिक उद्देश्य से किया गया है, और ऐसे किसी अपमान के कोई प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं का सम्मान करती है और विरोधियों से अपील की कि वे ऐसी गलत जानकारी न फैलाईँ जो सामाजिक तनाव को बढ़ा सके।
शुद्धिकरण समारोह स्थानीय दलित कल्याण समूह द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें समुदाय को आशीर्वाद देने के लिए पारम्परिक रीति‑रिवाजों का पालन किया गया। कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के समाप्त हुआ, पर इस विवाद ने दलित वोटों के लिए दोनो पार्टियों के बीच चल रहे प्रतिस्पर्धा को फिर से उजागर किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दलित वर्ग को आकर्षित करने की दोनों पार्टियों की रणनीति को दर्शाती है, जहाँ प्रत्येक पार्टी खुद को समुदाय के हितों की रक्षा करने वाला प्रस्तुत कर रही है।