📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
विदेश
बीजिंग ने मोदी के बयानों की सराहना की, ब्रिक्स 2026 में भारत-चीन नेताओं की मुलाकात के बाद
✍️ The Economic Times
🗓 15 सित. 2026, 04:33 AM
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चीन के विदेश मंत्रालय ने ब्रिक्स 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद मोदी के बयानों को महत्व दिया, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक रुख का संकेत मिला।
नई दिल्ली और बीजिंग ने ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद पारस्परिक सम्मानजनक बयानों का आदान‑प्रदान किया। चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में मोदी के बयानों को "महत्व" दिया, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में रचनात्मक रुख का संकेत मिला।
ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के इस बहुपक्षीय मंच पर दोनों देशों ने व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर बताया। हालांकि कोई विशिष्ट समझौता घोषित नहीं किया गया, लेकिन माहौल को सौहार्दपूर्ण बताया गया।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन की इस सराहना का उद्देश्य कूटनीतिक संवाद को जारी रखना है, जबकि दोनों देशों के बीच इंडो‑पैसिफिक में प्रतिस्पर्धी हित मौजूद हैं। यह बयान बीजिंग की रणनीतिक तनावों के बीच संवाद बनाए रखने की इच्छा को दर्शाता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने का मंच प्रदान करता है, और मोदी‑शी की इस मुलाकात को व्यापक एजेंडा के भीतर एक प्रमुख कूटनीतिक क्षण माना जा रहा है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, परन्तु इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच आगामी व्यापार और निवेश वार्ताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के इस बहुपक्षीय मंच पर दोनों देशों ने व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर बताया। हालांकि कोई विशिष्ट समझौता घोषित नहीं किया गया, लेकिन माहौल को सौहार्दपूर्ण बताया गया।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन की इस सराहना का उद्देश्य कूटनीतिक संवाद को जारी रखना है, जबकि दोनों देशों के बीच इंडो‑पैसिफिक में प्रतिस्पर्धी हित मौजूद हैं। यह बयान बीजिंग की रणनीतिक तनावों के बीच संवाद बनाए रखने की इच्छा को दर्शाता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने का मंच प्रदान करता है, और मोदी‑शी की इस मुलाकात को व्यापक एजेंडा के भीतर एक प्रमुख कूटनीतिक क्षण माना जा रहा है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, परन्तु इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच आगामी व्यापार और निवेश वार्ताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।