📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Kandukuru Nagarjun from Bangalore, India
विज्ञान
बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बारहसिंगा की वापसी, एक सदी का इंतज़ार ख़त्म
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 05 नव. 2026, 08:45 AM
👁 16
लगभग एक सदी बाद, कान्हा से लाए गए 48 बारहसिंगों ने बांधवगढ़ में बसना शुरू किया, और मई 2026 तक उनकी संख्या 65 तक पहुँच गई।
वन्यजीव प्राधिकरणों ने लगभग एक सदी के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बारहसिंगा (स्वैम्प डियर) को सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किया है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से 48 बारहसिंगा को इस वर्ष प्रारंभ में घास के मैदानों में छोड़ा गया।
मई 2026 तक इनकी संख्या 65 तक पहुँच गई है, जो नई आवासीय परिस्थितियों में उनकी स्वस्थ अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है। यह वृद्धि वैज्ञानिक निगरानी, अतिरिक्त भोजन व्यवस्था और शिकारियों से बचाव के लिए सख्त सुरक्षा पहरे के कारण संभव हुई है।
संरक्षण विशेषज्ञ इस उपलब्धि को मध्य प्रदेश के वन्यजीव प्रबंधन में एक मील का पत्थर मानते हैं, क्योंकि इससे क्षेत्र की जैव विविधता में वृद्धि हुई है और उस प्रमुख शाकाहारी प्रजाति को फिर से स्थापित किया गया है, जो पहले इस क्षेत्र में व्यापक रूप से पाई जाती थी।
यह परियोजना टाइगर रिज़र्व में शिकार‑शिकारियों के संतुलन को बनाए रखने के व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य दीर्घकालिक रूप से बाघ और बारहसिंगा दोनों की आबादी को स्थिर रखना है।
अधिकारी नियमित स्वास्थ्य जांच और आवासीय मूल्यांकन जारी रखने की योजना बना रहे हैं, ताकि बारहसिंगा की निरंतर वृद्धि सुनिश्चित हो और इस मॉडल को देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों में दोहराया जा सके।
मई 2026 तक इनकी संख्या 65 तक पहुँच गई है, जो नई आवासीय परिस्थितियों में उनकी स्वस्थ अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है। यह वृद्धि वैज्ञानिक निगरानी, अतिरिक्त भोजन व्यवस्था और शिकारियों से बचाव के लिए सख्त सुरक्षा पहरे के कारण संभव हुई है।
संरक्षण विशेषज्ञ इस उपलब्धि को मध्य प्रदेश के वन्यजीव प्रबंधन में एक मील का पत्थर मानते हैं, क्योंकि इससे क्षेत्र की जैव विविधता में वृद्धि हुई है और उस प्रमुख शाकाहारी प्रजाति को फिर से स्थापित किया गया है, जो पहले इस क्षेत्र में व्यापक रूप से पाई जाती थी।
यह परियोजना टाइगर रिज़र्व में शिकार‑शिकारियों के संतुलन को बनाए रखने के व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य दीर्घकालिक रूप से बाघ और बारहसिंगा दोनों की आबादी को स्थिर रखना है।
अधिकारी नियमित स्वास्थ्य जांच और आवासीय मूल्यांकन जारी रखने की योजना बना रहे हैं, ताकि बारहसिंगा की निरंतर वृद्धि सुनिश्चित हो और इस मॉडल को देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों में दोहराया जा सके।