📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep
स्वास्थ्य
पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामलों की संख्या 4,500 से अधिक, एक हफ्ते में 500 नए
✍️ Mid-Day
🗓 07 सित. 2026, 02:33 PM
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पश्चिम बंगाल में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 4,500 से ऊपर पहुँच गई है, जबकि पिछले सात दिनों में 500 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं, जैसा कि मिड‑डे ने बताया।
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि राज्य में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 4,500 से ऊपर पहुँच गई है, जिसमें पिछले सात दिनों में 500 से अधिक नए संक्रमण दर्ज हुए हैं, यह मिड‑डे ने बताया।
विभाग ने कहा है कि जहाँ संक्रमण की गति अधिक है, उन जिलों में धुंधला करने और लार्विसाइड के माध्यम से मच्छर नियंत्रण कार्य तेज़ किया जा रहा है। साथ ही अस्पतालों को गंभीर मामलों के लिए पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध कराने की चेतावनी दी गई है।
डेंगू आमतौर पर मानसून और उसके बाद के महीनों में चरम पर रहता है, और इस हालिया वृद्धि ने समुदाय की भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया है। निवासियों को कंटेनरों, फूलदानों और फेंके गए टायरों में जमा स्थिर पानी को हटाने की सलाह दी जा रही है ताकि मच्छर के प्रजनन को रोका जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि शुरुआती पहचान और शीघ्र उपचार जटिलताओं को कम करने में महत्वपूर्ण है। विभाग ने स्थानीय मीडिया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से जागरूकता अभियानों की शुरुआत की है, जिसमें रिपेलेंट का उपयोग और बुखार व जोड़ों में दर्द होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने पर ज़ोर दिया गया है।
विभाग ने कहा है कि जहाँ संक्रमण की गति अधिक है, उन जिलों में धुंधला करने और लार्विसाइड के माध्यम से मच्छर नियंत्रण कार्य तेज़ किया जा रहा है। साथ ही अस्पतालों को गंभीर मामलों के लिए पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध कराने की चेतावनी दी गई है।
डेंगू आमतौर पर मानसून और उसके बाद के महीनों में चरम पर रहता है, और इस हालिया वृद्धि ने समुदाय की भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया है। निवासियों को कंटेनरों, फूलदानों और फेंके गए टायरों में जमा स्थिर पानी को हटाने की सलाह दी जा रही है ताकि मच्छर के प्रजनन को रोका जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि शुरुआती पहचान और शीघ्र उपचार जटिलताओं को कम करने में महत्वपूर्ण है। विभाग ने स्थानीय मीडिया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से जागरूकता अभियानों की शुरुआत की है, जिसमें रिपेलेंट का उपयोग और बुखार व जोड़ों में दर्द होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने पर ज़ोर दिया गया है।