📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mullookkaaran
मनोरंजन
दिग्गज फिल्मनिर्माता आदूर गोपालकृष्णन ने 10 साल के ब्रेक और 'सर्वश्रेष्ठ' टैग पर बात की
✍️ India Today
🗓 31 अग. 2026, 01:33 PM
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आदूर गोपालकृष्णन ने इंडिया टुडे को अपने दस साल के निर्देशन ब्रेक और उन्हें सर्वश्रेष्ठ फिल्मनिर्माता कहा जाने पर अपने विचार बताये।
भारतीय समानांतर सिनेमा के अग्रणी दिग्गज फिल्मनिर्माता आदूर गोपालकृष्णन ने हाल ही में इंडिया टुडे के साथ एक साक्षात्कार में अपने दस साल के निर्देशन ब्रेक के कारणों को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह विराम व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में बदलाव और फिल्म निर्माण के अन्य पहलुओं को समझने की इच्छा के कारण स्वैच्छिक था।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में उन्होंने कोई निश्चित वापसी की तिथि तय नहीं की है, परन्तु सलाहकार और मेंटर की भूमिका में फिल्म जगत से जुड़े हुए हैं।
आदूर ने अपने बारे में अक्सर दिया जाने वाला "सर्वश्रेष्ठ फिल्मनिर्माता" टैग भी चर्चा में लाया। उन्होंने इस प्रशंसा को अपने कार्यों की मान्यता के रूप में स्वीकार किया, पर यह भी रेखांकित किया कि सिनेमा एक सामूहिक कला है और कई कलाकारों ने इसके विकास में योगदान दिया है।
उन्होंने अपने कुछ प्रमुख कार्यों, जैसे "एलिप्पाथायम्" और "मुखामुखम्" का उल्लेख किया और बताया कि ये फिल्में नई पीढ़ी के फिल्म निर्माताओं को प्रेरित करती रहती हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि ब्रेक के बावजूद उनकी कला के प्रति प्रतिबद्धता अडिग है और वह ऐसे अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो उनकी रचनात्मक दृष्टि से मेल खाते हों।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में उन्होंने कोई निश्चित वापसी की तिथि तय नहीं की है, परन्तु सलाहकार और मेंटर की भूमिका में फिल्म जगत से जुड़े हुए हैं।
आदूर ने अपने बारे में अक्सर दिया जाने वाला "सर्वश्रेष्ठ फिल्मनिर्माता" टैग भी चर्चा में लाया। उन्होंने इस प्रशंसा को अपने कार्यों की मान्यता के रूप में स्वीकार किया, पर यह भी रेखांकित किया कि सिनेमा एक सामूहिक कला है और कई कलाकारों ने इसके विकास में योगदान दिया है।
उन्होंने अपने कुछ प्रमुख कार्यों, जैसे "एलिप्पाथायम्" और "मुखामुखम्" का उल्लेख किया और बताया कि ये फिल्में नई पीढ़ी के फिल्म निर्माताओं को प्रेरित करती रहती हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि ब्रेक के बावजूद उनकी कला के प्रति प्रतिबद्धता अडिग है और वह ऐसे अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो उनकी रचनात्मक दृष्टि से मेल खाते हों।