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04 Nov 2026•
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Crime

वधू मूल्य (दापा प्रथा) के नाम पर बेटियों का सौदा, कुप्रथा की आड़ में घुट रहा मासूमों का दम

✍️ Reporter: Rajkumar Kaithwas 🗓 04 Nov 2026, 01:37 PM 👁 13
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बड़वाह/पुनासा।
सदियों पुरानी कुप्रथाएँ आज भी आधुनिक समाज के लिए एक बड़ा कलंक बनी हुई हैं। एक ओर जहां देश का बड़ा हिस्सा दहेज प्रथा जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी और ग्रामीण अंचलों में प्रचलित "वधू मूल्य" (दापा प्रथा) बेटियों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। इस प्रथा की आड़ में आज भी कई क्षेत्रों में चंद रुपयों के लिए बेटियों का सौदा किया जा रहा है, जिससे मासूम लड़कियाँ गंभीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं।

हाल ही में पुनासा तहसील के ग्राम दौलतपुरा और बड़वाह के ग्राम सिरलाय के बीच एक ऐसा ही झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने इस कुप्रथा के काले सच को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

*दो बार बेची गई बेटी, नर्सरी में मिला सच्चा जीवनसाथी*

यह दर्दनाक कहानी ग्राम दौलतपुरा निवासी आदिवासी लड़की रमा पिता सुरसिंग की है। रमा के पिता ने वधू मूल्य (दापा प्रथा) के तहत अपनी ही बेटी का सौदा करते हुए उसकी दो बार शादी करा दी थी। लेकिन किस्मत का क्रूर खेल देखिए,रमा को दोनों ही पतियों के घर पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। थक-हारकर रमा वापस अपने मायके लौट आई।
इसके बाद रमा अपने माता-पिता के साथ पेट पालने के लिए सिरलाय की एक नर्सरी में मजदूरी करने लगी। इसी दौरान उसकी मुलाकात सिरलाय निवासी सुनील वाशिंदे से हुई। काम के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे एक-दूसरे से प्रेम कर बैठे।

*कुप्रथा की बेड़ियां तोड़ रचाई शादी*

रमा ने अतीत के काले साये और समाज की इस कुप्रथा को दरकिनार करते हुए सुनील के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। दोनों ने 22 सितम्बर 2026 को आर्य समाज मंदिर में पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह रचा लिया।
शादी के बाद इस मामले ने तब कानूनी मोड़ ले लिया जब रमा ने 25 सितम्बर को खुद बड़वाह थाने पहुँचकर हिम्मत दिखाई। उसने अपने माता-पिता, पुलिस प्रशासन और अपने पूर्व पति राकेश (पिता विट्ठल) के सामने साफ तौर पर सुनील के पक्ष में बयान दर्ज कराए। इसके अलावा राकेश से शादी के समय उसके पिता द्वारा लिए गए 30 हजार रुपए भी 10 अक्टूबर तक लौटाने का करार किया।रमा ने दृढ़ता से कहा कि वह अब सुनील के साथ ही अपनी आगे की जिंदगी बिताना चाहती है।

लेकिन बाद मे रमा और राकेश के परिवार वालो ने सुनील के परिवार के सामने लाखो रुपए की मांग रख दी। जो नही देने पर सुनील के परिवार को मारने काटने की धमकी देकर चले गये। सुनील के पिता बलराम वाशिंदे के अनुसार 11 अक्टू को उनका परिवार दिन भर मजदूरी करके जब शाम को घर पहुचा तो आसपास के लोगो से पता चला कि,उनकी गैर मौजूदगी मे एक गाडी भरकर लगभग 40-50 लोग उसके परिवार को मारने आए थे। यह सुनकर अपने परिवार की जान जोखिम मे जानकर सुनील का पुरा परिवार तबसे गांव व शहर छोडकर कहीं बाहर चले गये है। बाद में 22 अक्टूबर को सुनील के पिता बलराम ने आकर बड़वाह,पुनासा थाने और खरगोन एवं खण्डवा पुलिस अधीक्षक को आवेदन के माध्यम से मामले की सूचना दी है।
यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि वधू मूल्य जैसी कुप्रथाएँ किस तरह लड़कियों के आत्मसम्मान और अधिकारों का हनन कर रही हैं, जहाँ पिता ही चंद रुपयों के लिए अपनी बेटी के भविष्य को दांव पर लगा देते हैं।

आदिवासी उत्थान समिति (बड़वाह) और वरिष्ठ भाजपा नेता श्री महिम ठाकुर ने बताया कि कई ग्रामीण अंचलों में अशिक्षित वर्गों द्वारा इस प्रथा का चलन आज भी किया जा रहा है। इस सामाजिक कुरीति को पूरी तरह समाप्त करने के लिए समाज में जागरूकता लाने का निरंतर प्रयास चल रहा है। अच्छी बात यह है कि शिक्षित वर्ग द्वारा कई जगहों पर इस प्रथा को बंद भी किया जा चुका है, और इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए समाजजन लगातार प्रयासरत हैं

फाइल चित्र
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