कृषि
वन विभाग के दावों के बीच हाथियों का तांडव, सेमरा-3 में किसान की धान की फसल बर्बाद; बोरिंग और बाउंड्रीवॉल को भी नुकसान
वन विभाग के दावों के बीच हाथियों का तांडव, सेमरा-3 में किसान की धान की फसल बर्बाद; बोरिंग और बाउंड्रीवॉल को भी नुकसान
वन विभाग के दावों के बीच हाथियों का तांडव, सेमरा-3 में किसान की धान की फसल बर्बाद; बोरिंग और बाउंड्रीवॉल को भी नुकसान
पीड़ित किसान हिमांशु सिंह को भारी नुकसान, वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल; ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
शहडोल। दक्षिण वन मंडल शहडोल के गोहपारू वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सेमरा-3 में हाथियों के झुंड ने एक बार फिर जमकर उत्पात मचाया। बीती रात हाथियों ने किसान हिमांशु सिंह के खेत में घुसकर लहलहाती धान की फसल को रौंद दिया। इतना ही नहीं, खेत में लगी बोरिंग को उखाड़कर नुकसान पहुंचाया तथा बाउंड्रीवॉल के कंक्रीट के खंभों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना से किसान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। दक्षिण वन मंडल की डीएफओ श्रद्धा पेद्रे और गोहपारू वन परिक्षेत्र के रेंजर हेमंत प्रजापति के नेतृत्व में वन अमले की सक्रियता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि वन विभाग का अमला लगातार फील्ड में सक्रिय है, तो हाथियों के मूवमेंट की समय रहते जानकारी क्यों नहीं मिल पाती? आखिर किसानों की फसलों और उनकी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही है?
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
ग्रामीणों के अनुसार सेमरा-3 क्षेत्र में हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक स्थायी समाधान और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो पाई है। हाथियों की आवाजाही से किसान और ग्रामीण रातभर दहशत में रहने को मजबूर हैं।
किसान को मुआवजा और सुरक्षा की मांग
पीड़ित किसान हिमांशु सिंह सहित ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया जाए और नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाकर ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई और पीड़ित किसान को उचित राहत नहीं मिली, तो गोहपारू वन परिक्षेत्र कार्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक किसान हाथियों के आतंक और फसल नुकसान का दर्द झेलते रहेंगे? क्या वन विभाग किसानों की सुरक्षा और उनकी मेहनत की कमाई बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा
पीड़ित किसान हिमांशु सिंह को भारी नुकसान, वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल; ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
शहडोल। दक्षिण वन मंडल शहडोल के गोहपारू वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सेमरा-3 में हाथियों के झुंड ने एक बार फिर जमकर उत्पात मचाया। बीती रात हाथियों ने किसान हिमांशु सिंह के खेत में घुसकर लहलहाती धान की फसल को रौंद दिया। इतना ही नहीं, खेत में लगी बोरिंग को उखाड़कर नुकसान पहुंचाया तथा बाउंड्रीवॉल के कंक्रीट के खंभों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना से किसान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। दक्षिण वन मंडल की डीएफओ श्रद्धा पेद्रे और गोहपारू वन परिक्षेत्र के रेंजर हेमंत प्रजापति के नेतृत्व में वन अमले की सक्रियता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि वन विभाग का अमला लगातार फील्ड में सक्रिय है, तो हाथियों के मूवमेंट की समय रहते जानकारी क्यों नहीं मिल पाती? आखिर किसानों की फसलों और उनकी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही है?
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
ग्रामीणों के अनुसार सेमरा-3 क्षेत्र में हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक स्थायी समाधान और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो पाई है। हाथियों की आवाजाही से किसान और ग्रामीण रातभर दहशत में रहने को मजबूर हैं।
किसान को मुआवजा और सुरक्षा की मांग
पीड़ित किसान हिमांशु सिंह सहित ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया जाए और नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाकर ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई और पीड़ित किसान को उचित राहत नहीं मिली, तो गोहपारू वन परिक्षेत्र कार्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक किसान हाथियों के आतंक और फसल नुकसान का दर्द झेलते रहेंगे? क्या वन विभाग किसानों की सुरक्षा और उनकी मेहनत की कमाई बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा