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उत्क्रम केमिकल्स ने असम‑पश्चिम बंगाल में बड़े फ़र्टिलाइज़र, पेट्रोकेमिकल व बिटुमेन प्लांट की योजना बनाई
✍️ Business Standard
🗓 29 अग. 2026, 08:33 PM
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उत्क्रम केमिकल्स ने असम और पश्चिम बंगाल में बड़े फ़र्टिलाइज़र, पेट्रोकेमिकल और बिटुमेन प्लांट स्थापित करने की योजना बताई, जिससे कंपनी के औद्योगिक विस्तार में बड़ी छलांग लग रही है।
उत्क्रम केमिकल्स ने असम और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर फ़र्टिलाइज़र, पेट्रोकेमिकल और बिटुमेन उत्पादन इकाइयों को स्थापित करने का इरादा जताया है। यह कदम कंपनी की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और घरेलू मांग को पूरा करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
इन सुविधाओं को राज्य सरकारों द्वारा पहचाने गए औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा, जिससे मौजूदा बुनियादी ढाँचे और लॉजिस्टिक नेटवर्क का लाभ उठाया जा सकेगा। निवेश की सटीक राशि नहीं बताई गई, पर कंपनी ने कहा है कि इस परियोजना में बड़े पैमाने पर पूँजी खर्च होगा और इससे क्षेत्र में कई रोजगार सृजित होंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार भारत के स्वनिर्भरता लक्ष्य के अनुरूप है, विशेषकर कृषि और बुनियादी ढाँचे के प्रमुख क्षेत्रों में। स्थानीय स्तर पर फ़र्टिलाइज़र, पेट्रोकेमिकल और बिटुमेन का उत्पादन बढ़ाकर उत्क्रम केमिकल्स आयात पर निर्भरता कम करना और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना चाहता है।
कंपनी ने अभी तक विस्तृत समय‑सीमा नहीं बताई है, पर नियामक मंजूरी और निर्माण चरणों को पार करने के बाद आने वाले वर्षों में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना है।
इन सुविधाओं को राज्य सरकारों द्वारा पहचाने गए औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा, जिससे मौजूदा बुनियादी ढाँचे और लॉजिस्टिक नेटवर्क का लाभ उठाया जा सकेगा। निवेश की सटीक राशि नहीं बताई गई, पर कंपनी ने कहा है कि इस परियोजना में बड़े पैमाने पर पूँजी खर्च होगा और इससे क्षेत्र में कई रोजगार सृजित होंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार भारत के स्वनिर्भरता लक्ष्य के अनुरूप है, विशेषकर कृषि और बुनियादी ढाँचे के प्रमुख क्षेत्रों में। स्थानीय स्तर पर फ़र्टिलाइज़र, पेट्रोकेमिकल और बिटुमेन का उत्पादन बढ़ाकर उत्क्रम केमिकल्स आयात पर निर्भरता कम करना और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना चाहता है।
कंपनी ने अभी तक विस्तृत समय‑सीमा नहीं बताई है, पर नियामक मंजूरी और निर्माण चरणों को पार करने के बाद आने वाले वर्षों में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना है।