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16 Oct 2026•
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*उर्वरक वितरण में अनियमितता पर कृषि विभाग सख्त, तीन विक्रेताओं को नोटिस

*उर्वरक वितरण में अनियमितता पर कृषि विभाग सख्त, तीन विक्रेताओं को नोटिस

✍️ Reporter: Suraj Poswal 🗓 16 Oct 2026, 08:59 PM 👁 7
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कालाबाजारी और अवैध परिवहन रोकने के लिए चेक पोस्ट स्थापित, जिले में 21,816 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध

उर्वरक वितरण में अनियमितता पर कृषि विभाग सख्त, तीन विक्रेताओं को नोटिस

कालाबाजारी और अवैध परिवहन रोकने के लिए चेक पोस्ट स्थापित, जिले में 21,816 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध

दौसा, 16 अक्टूबर। रबी फसल की बुवाई के सीजन में किसानों को डीएपी, यूरिया एवं एसएसपी उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था सख्त कर दी है। जिले में उर्वरकों के अवैध परिवहन एवं अनियमित वितरण पर अंकुश लगाने के लिए चेक पोस्ट स्थापित कर कार्मिकों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं, शुक्रवार को निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं मिलने पर तीन उर्वरक विक्रेताओं को मौके पर ही कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) दौसा रामराज मीणा ने बताया कि जिले में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी के लिए ब्लॉकवार प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। अधिकृत उर्वरक विक्रय केंद्रों पर कृषि विभाग के कार्मिकों की तैनाती कर उनकी उपस्थिति में वितरण सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उर्वरक मिल सके।

कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले में कुल 21,816 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इसमें 10,521 मीट्रिक टन यूरिया, 1,715 मीट्रिक टन डीएपी, 7,288 मीट्रिक टन एसएसपी तथा 2,365 मीट्रिक टन एनपीके शामिल हैं। विभाग ने बताया कि जिले में उर्वरकों की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी, ताकि किसानों को बुवाई के दौरान परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

*जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित*
सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) दौसा अशोक कुमार मीना ने बताया कि उर्वरकों के सुचारू वितरण और किसानों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। इसमें विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।
किसान उर्वरकों की उपलब्धता, निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने, कालाबाजारी अथवा अन्य अनियमितताओं से संबंधित शिकायत नियंत्रण कक्ष की प्रभारी अधिकारी अंजली शर्मा, कृषि अधिकारी (पौध संरक्षण), दौसा के मोबाइल नंबर 9782210812 पर दर्ज करवा सकते हैं।

*पीओएस मशीन पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद मिलेगा उर्वरक*
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) रामराज मीणा ने बताया कि उर्वरक वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डीएपी एवं यूरिया का विक्रय पीओएस मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही किया जाएगा। बिना पीओएस मशीन के उर्वरक बेचने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता होने पर संबंधित विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

*अधिक दर पर बिक्री और जबरन टैगिंग पर होगी कार्रवाई*
कृषि विभाग द्वारा उर्वरक विक्रय केंद्रों पर निर्धारित दरों के अनुसार बिक्री सुनिश्चित करने के लिए निगरानी की जा रही है। निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलने, उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद जबरन देने, कालाबाजारी करने अथवा वितरण में अनियमितता की शिकायत मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

*अवैध परिवहन रोकने के लिए चेक पोस्ट पर निगरानी*
जिले से बाहर उर्वरकों के अवैध परिवहन को रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर चेक पोस्ट स्थापित कर कार्मिकों की ड्यूटी लगाई गई है। इन चेक पोस्टों पर अधिकारियों द्वारा आकस्मिक निरीक्षण भी किया जाएगा। साथ ही, उर्वरक निर्माता एवं आपूर्तिकर्ता कंपनियों को मांग के अनुरूप नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सहकारी क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए किसानों की भूमि जोत एवं वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

*किसान अधिकृत केंद्रों से ही खरीदें उर्वरक*
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरक अधिकृत विक्रय केंद्रों से ही खरीदें तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करवाएं। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें। यदि कोई विक्रेता निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलता है, उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करता है या कालाबाजारी करता है, तो इसकी शिकायत संबंधित कृषि अधिकारी अथवा जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष में दर्ज करवाएं। कृषि विभाग का उद्देश्य रबी सीजन में किसानों को उचित दर पर समयबद्ध तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना तथा वितरण व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुचारु बनाए रखना है।
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