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UPI पर MDR चार्ज के ऐलान से घटे ट्रांजैक्शन, सितंबर में 1.8% की आई गिरावट
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2 अक्टूबर को 'No UPI Day' प्रोटेस्ट के बीच, 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर MDR चार्ज लगने के ऐलान का असर दिखने लगा है। सितंबर महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन में 1.8% की गिरावट दर्ज की गई है।
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूपीआई (UPI) के इस्तेमाल में सितंबर महीने में गिरावट देखी गई है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज के ऐलान के बाद, जो 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लागू होना है, लोगों ने इस माध्यम से लेन-देन कम कर दिया है। सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या में 1.8% की गिरावट आई है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में यूपीआई के जरिए 2,450 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जो सितंबर में घटकर 2,407 करोड़ रह गए। इसी तरह, ट्रांजैक्शन के कुल मूल्य में भी 1.50% की कमी आई है, जो अगस्त में 29.82 लाख करोड़ रुपये था और सितंबर में 29.37 लाख करोड़ रुपये हो गया।
हालांकि यह MDR चार्ज सीधे तौर पर व्यापारियों पर लगना है, लेकिन आम उपभोक्ताओं में यह डर है कि दुकानदार इस अतिरिक्त लागत की भरपाई उनसे ही कर सकते हैं, या तो कीमतें बढ़ाकर या छूट कम करके। इस चिंता के चलते व्यापारियों ने 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' मनाते हुए अपने QR स्कैनर को काले कपड़ों से ढककर विरोध जताया था।
दूसरी ओर, कुछ बाजार जानकारों का मानना है कि सितंबर में आई यह गिरावट अगस्त की तुलना में एक दिन कम होने के कारण भी हो सकती है, क्योंकि अगस्त 31 दिनों का था जबकि सितंबर 30 दिनों का। उनके अनुसार, सितंबर में प्रतिदिन औसतन 80.2 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए, जो अगस्त के 79.1 करोड़ प्रतिदिन के आंकड़े से अधिक है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में यूपीआई के जरिए 2,450 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जो सितंबर में घटकर 2,407 करोड़ रह गए। इसी तरह, ट्रांजैक्शन के कुल मूल्य में भी 1.50% की कमी आई है, जो अगस्त में 29.82 लाख करोड़ रुपये था और सितंबर में 29.37 लाख करोड़ रुपये हो गया।
हालांकि यह MDR चार्ज सीधे तौर पर व्यापारियों पर लगना है, लेकिन आम उपभोक्ताओं में यह डर है कि दुकानदार इस अतिरिक्त लागत की भरपाई उनसे ही कर सकते हैं, या तो कीमतें बढ़ाकर या छूट कम करके। इस चिंता के चलते व्यापारियों ने 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' मनाते हुए अपने QR स्कैनर को काले कपड़ों से ढककर विरोध जताया था।
दूसरी ओर, कुछ बाजार जानकारों का मानना है कि सितंबर में आई यह गिरावट अगस्त की तुलना में एक दिन कम होने के कारण भी हो सकती है, क्योंकि अगस्त 31 दिनों का था जबकि सितंबर 30 दिनों का। उनके अनुसार, सितंबर में प्रतिदिन औसतन 80.2 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए, जो अगस्त के 79.1 करोड़ प्रतिदिन के आंकड़े से अधिक है।