📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prince Roy
अपराध
अज्ञानवश नकली कार बीमा दस्तावेज़ इस्तेमाल करने पर क्या आप जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं?
✍️ The Times of India
🗓 29 अग. 2026, 09:39 PM
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अज्ञानवश नकली बीमा प्रमाणपत्र का उपयोग करने वाले चालक को भी भारतीय कानून के तहत कानूनी दायित्व का सामना करना पड़ सकता है।
हाल ही में एक जांच ने यह स्पष्ट किया है कि नकली बीमा दस्तावेज़ का उपयोग दुर्घटना में चालक को दायित्व के तहत रख सकता है, भले ही धोखाधड़ी उनके ज्ञान में न हो।
मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत सभी मोटर वाहनों के लिए वैध बीमा प्रमाणपत्र अनिवार्य है। धारा 115 के अनुसार झूठे प्रमाणपत्र का उपयोग अपराध है, और धारा 116 के तहत अधिकतम ₹5 लाख जुर्माना और दो वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है।
न्यायालयों ने लगातार यह निर्णय लिया है कि अज्ञानता दायित्व से मुक्त नहीं करती। कानून के अनुसार जिम्मेदार मालिक को उचित परिश्रम करना चाहिए और पॉलिसी की प्रामाणिकता की पुष्टि करनी चाहिए।
वकीलों का कहना है कि मोटर चालकों को बीमाकर्ता की आधिकारिक वेबसाइट पर पॉलिसी नंबर की जाँच करनी चाहिए, और डिजिटल कॉपी रखनी चाहिए ताकि अनजाने में नियमों का उल्लंघन न हो।
मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत सभी मोटर वाहनों के लिए वैध बीमा प्रमाणपत्र अनिवार्य है। धारा 115 के अनुसार झूठे प्रमाणपत्र का उपयोग अपराध है, और धारा 116 के तहत अधिकतम ₹5 लाख जुर्माना और दो वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है।
न्यायालयों ने लगातार यह निर्णय लिया है कि अज्ञानता दायित्व से मुक्त नहीं करती। कानून के अनुसार जिम्मेदार मालिक को उचित परिश्रम करना चाहिए और पॉलिसी की प्रामाणिकता की पुष्टि करनी चाहिए।
वकीलों का कहना है कि मोटर चालकों को बीमाकर्ता की आधिकारिक वेबसाइट पर पॉलिसी नंबर की जाँच करनी चाहिए, और डिजिटल कॉपी रखनी चाहिए ताकि अनजाने में नियमों का उल्लंघन न हो।