📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President's Secretariat
टेक्नोलॉजी
संघ मंत्री एन. कुमारस्वामी ने यूएस यात्रा में तकनीकी ज्ञान भारत लाने की पुकार
✍️ The Tribune
🗓 07 सित. 2026, 08:40 AM
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संघ मंत्री एन. कुमारस्वामी ने यूएस यात्रा के दौरान भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों से अपने ज्ञान को भारत लौटाने और नई कंपनियों की स्थापना करने का आग्रह किया।
संघ मंत्री एन. कुमारस्वामी इस सप्ताह संयुक्त राज्य अमेरिका पहुंचे, जहाँ वे तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भारत‑अमेरिका सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।
वाशिंगटन में आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने विदेश में कार्यरत भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों से अपने तकनीकी अनुभव को भारत में लाने का आग्रह किया, यह बताया कि ऐसा ज्ञान स्थानांतरण देश के डिजिटल और विनिर्माण लक्ष्यों को तेज़ कर सकता है।
कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार लौटते हुए प्रतिभाओं द्वारा स्थापित स्टार्ट‑अप और स्केल‑अप को नीति समर्थन, वित्तीय सहायता और अन्य प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए तैयार है, और प्रवासी भारतीयों को भारत को वैश्विक उद्यमों के निर्माण के लिए उपजाऊ भूमि के रूप में देखने का आह्वान किया।
उन्होंने उत्पादन‑लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम को ऐसे ढाँचे के रूप में उद्धृत किया, जो लौटते पेशेवरों को लाभ पहुँचा सकते हैं, और निजी क्षेत्र व राज्य के बीच समन्वित प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।
मंत्री के बयानों को भारतीय तकनीकी नेताओं, निवेशकों और दोनों देशों के अधिकारियों सहित श्रोताओं ने सकारात्मक रूप से सराहा, जिससे आर्थिक संबंधों को गहरा करने की पारस्परिक इच्छा स्पष्ट हुई।
वाशिंगटन में आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने विदेश में कार्यरत भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों से अपने तकनीकी अनुभव को भारत में लाने का आग्रह किया, यह बताया कि ऐसा ज्ञान स्थानांतरण देश के डिजिटल और विनिर्माण लक्ष्यों को तेज़ कर सकता है।
कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार लौटते हुए प्रतिभाओं द्वारा स्थापित स्टार्ट‑अप और स्केल‑अप को नीति समर्थन, वित्तीय सहायता और अन्य प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए तैयार है, और प्रवासी भारतीयों को भारत को वैश्विक उद्यमों के निर्माण के लिए उपजाऊ भूमि के रूप में देखने का आह्वान किया।
उन्होंने उत्पादन‑लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम को ऐसे ढाँचे के रूप में उद्धृत किया, जो लौटते पेशेवरों को लाभ पहुँचा सकते हैं, और निजी क्षेत्र व राज्य के बीच समन्वित प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।
मंत्री के बयानों को भारतीय तकनीकी नेताओं, निवेशकों और दोनों देशों के अधिकारियों सहित श्रोताओं ने सकारात्मक रूप से सराहा, जिससे आर्थिक संबंधों को गहरा करने की पारस्परिक इच्छा स्पष्ट हुई।