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दुल्हिन बाजार के कई इलाकों में गहराया जल संकट
बारिश के मौसम में किसानों और ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड के कई गांव इन दिनों बारिश के मौसम में भी भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने और नहरी क्षेत्र होने के बावजूद नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से धान की खेती पर संकट गहरा गया है। सिंचाई के लिए किसानों द्वारा बड़ी संख्या में निजी बोरिंग का सहारा लेने से भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। इसका असर अब ग्रामीणों के घरों के चापाकलों पर भी साफ दिखाई दे रहा है, जो एक-एक कर सूखते जा रहे हैं।
प्रखंड के सोरमपुर और महुआबाग गांव में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बताई जा रही है। यहां दर्जनों परिवारों के चापाकल जवाब दे चुके हैं, जिससे पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आसपास लगे समरसेबल मोटरों या दूर स्थित चालू चापाकलों से पानी लाने को मजबूर हैं।
स्थानीय ग्रामीण पिंटू मिस्री ने बताया कि गांव के लगभग 15 घरों के चापाकल सूख चुके हैं। पानी की व्यवस्था करने में लोगों को रोज भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
महुआबाग निवासी सोनू कुमार ने कहा कि गांव में पानी की भारी किल्लत है। पूरे गांव के लोग दूर स्थित एकमात्र चालू चापाकल से पानी ढोकर लाने को विवश हैं। वहीं रामनाथ पंडित ने बताया कि उनके गांव का चापाकल करीब एक महीने पहले ही सूख गया था। अब तक स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी पहल नहीं की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नल-जल योजना का पानी भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रहा है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि खराब पड़े पुराने चापाकलों की शीघ्र मरम्मत कर उन्हें चालू कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
उधर, उलार-सोरमपुर पंचायत के मुखिया संदीप कुमार ने बताया कि पंचायत के प्रत्येक घर तक नल-जल योजना का पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां चापाकल सूख गए हैं, उनकी मरम्मत कर पुनः चालू कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) को भी सूचना भेजी गई है और जल्द आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद है।
प्रखंड के सोरमपुर और महुआबाग गांव में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बताई जा रही है। यहां दर्जनों परिवारों के चापाकल जवाब दे चुके हैं, जिससे पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आसपास लगे समरसेबल मोटरों या दूर स्थित चालू चापाकलों से पानी लाने को मजबूर हैं।
स्थानीय ग्रामीण पिंटू मिस्री ने बताया कि गांव के लगभग 15 घरों के चापाकल सूख चुके हैं। पानी की व्यवस्था करने में लोगों को रोज भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
महुआबाग निवासी सोनू कुमार ने कहा कि गांव में पानी की भारी किल्लत है। पूरे गांव के लोग दूर स्थित एकमात्र चालू चापाकल से पानी ढोकर लाने को विवश हैं। वहीं रामनाथ पंडित ने बताया कि उनके गांव का चापाकल करीब एक महीने पहले ही सूख गया था। अब तक स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी पहल नहीं की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नल-जल योजना का पानी भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रहा है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि खराब पड़े पुराने चापाकलों की शीघ्र मरम्मत कर उन्हें चालू कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
उधर, उलार-सोरमपुर पंचायत के मुखिया संदीप कुमार ने बताया कि पंचायत के प्रत्येक घर तक नल-जल योजना का पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां चापाकल सूख गए हैं, उनकी मरम्मत कर पुनः चालू कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) को भी सूचना भेजी गई है और जल्द आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद है।