🔥 TRENDING Bangladesh Labels Sheikh Hasina a Conv... NSE CEO Predicts Faster Indian Economi... मन के अंधकार को ज्ञान रूपी रोशनी मिटात... El Niño Drives Seasonal Milk Supply Ri... Samvat 2083 Commences: What Does the N... India's National Interests Should Take...
08 Nov 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
दो सरकारी विभागों की खींचतान में घुट रहा जनता का दम, पानी के लिए तरसे ग्रामीण

दो सरकारी विभागों की खींचतान में घुट रहा जनता का दम, पानी के लिए तरसे ग्रामीण

✍️ Reporter: Rajendra Kumar sen 🗓 20 Sep 2026, 11:45 AM 👁 373
Watch on: ▶️ YouTube
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post
दो सरकारी विभागों की खींचतान में घुट रहा जनता का दम, पानी के लिए तरसे ग्रामीण
​नाचना जैसलमेर
​क्षेत्रीय जल संकट: पेयजल और नहर विभाग की आपसी सामंजस्यहीनता और टालमटोल की नीति ने आम जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसा दिया है। एसकेडी वितरिका (बुर्जी संख्या 1254) से जुड़े सकड़िया गांव और आसपास के क्षेत्रों में पानी की किल्लत अब भीषण रूप ले चुकी है।
​अवैध 'थल' से थमा पानी का प्रवाह
पीएचईडी (जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग) के जेई का कहना है कि 1254 बुर्जी से निकलने वाली एसकेडी वितरिका से ही सकड़िया स्थित डग्गियों (पेयजल डिगियों) में पेयजल आपूर्ति का पानी पहुंचता है। हालांकि, रास्ते में कुछ दबंगों और असामाजिक तत्वों द्वारा नहर में अवैध 'थल' (अवैध अवरोध/बंधे) लगा दिए गए हैं। इस वजह से पानी मुख्य डिगियों तक पहुंच ही नहीं पा रहा और सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
​नहर विभाग की झाड़ती जिम्मेदारियां
दूसरी ओर, नहर विभाग अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ता नजर आ रहा है। अधिकारियों का तर्क है कि उनका काम सिर्फ सात दिनों की नहर बंदी और संचालन चक्र तक सीमित है। उनका कहना है कि "नहर चलने के बाद यदि कोई अवैध थल लगाता है, तो इसमें हम क्या करें?"
​नियम ताक पर, आखिर जिम्मेदार कौन?
नहर विभाग का यह तर्क जल नियमों के पूरी तरह विपरीत है। नियमों के अनुसार, नहर के कैचमेंट क्षेत्र में अवैध थल लगाना, पानी की चोरी करना या प्रवाह रोकना सीधे तौर पर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की सीमा में आता है। अवैध थल को हटाने और ऐसा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने का प्राथमिक दायित्व नहर विभाग का ही है, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।
​जनता बेहाल, अधिकारी बेपरवाह
दोनों विभागों के बीच जारी इस 'लेटर वॉर' और खींचतान का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। एक तरफ पीएचईडी बेबस नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ नहर विभाग जिम्मेदारी लेने से मुकर रहा है।
​ग्रामीणों की मांग: ग्रामीणों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि दोनों विभागों की बैठक बुलाकर तुरंत कार्रवाई की जाए, अवैध थल हटाए जाएं और दोषियों पर मुकदमा दर्ज कर पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए।
📲Get App