📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / OORUTHENDI . com
खेल
१६ साल की शरण्या खेरुका की महाराष्ट्र के पैराथलीटों पर किताब को पीसीआई अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने सराहा
✍️ Business Standard
🗓 13 अक्टू. 2026, 03:33 AM
👁 17
१६ साल की शरण्या खेरुका की महाराष्ट्र के पैराथलीटों पर लिखी किताब को पैरालिंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने सराहा है।
महाराष्ट्र की १६‑साल की लेखिका शरण्या खेरुका ने राज्य के पैराथलीटों और उनके उपलब्धियों को दर्शाती एक पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक को हाल ही में पैरालिंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने सराहा। झाझरिया ने कहा कि यह पुस्तक पैरास्पोर्ट्स को आवश्यक पहचान दिलाने और शारीरिक सीमाओं के बावजूद खेल में युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
झाझरिया ने अपने बयान में बताया कि यह पुस्तक न केवल एक शैक्षिक साधन है, बल्कि आम जनता को पैराथलीटों की कहानियों से प्रेरित करने का माध्यम भी है। उन्होंने पूरे देश में अनुकूल खेल सुविधाओं और समर्थन को बढ़ावा देने के लिए ऐसे दस्तावेज़ों की आवश्यकता पर बल दिया।
यह सराहना PCI के समावेशी खेल को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के तहत दी गई है। शरण्या की पुस्तक को स्कूलों और खेल अकादमियों में उपयोग करने की योजना है, जिससे पैरास्पोर्ट्स के प्रति जागरूकता बढ़े और विभिन्न पृष्ठभूमियों के उभरते खिलाड़ियों को प्रेरणा मिले।
पुस्तक की रिलीज़ को खेल अधिकारियों और विकलांग अधिकार संगठनों ने सकारात्मक रूप से स्वागत किया है, जो इसे महाराष्ट्र के खेल परिदृश्य में पैराथलीटों के योगदान को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।
झाझरिया ने अपने बयान में बताया कि यह पुस्तक न केवल एक शैक्षिक साधन है, बल्कि आम जनता को पैराथलीटों की कहानियों से प्रेरित करने का माध्यम भी है। उन्होंने पूरे देश में अनुकूल खेल सुविधाओं और समर्थन को बढ़ावा देने के लिए ऐसे दस्तावेज़ों की आवश्यकता पर बल दिया।
यह सराहना PCI के समावेशी खेल को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के तहत दी गई है। शरण्या की पुस्तक को स्कूलों और खेल अकादमियों में उपयोग करने की योजना है, जिससे पैरास्पोर्ट्स के प्रति जागरूकता बढ़े और विभिन्न पृष्ठभूमियों के उभरते खिलाड़ियों को प्रेरणा मिले।
पुस्तक की रिलीज़ को खेल अधिकारियों और विकलांग अधिकार संगठनों ने सकारात्मक रूप से स्वागत किया है, जो इसे महाराष्ट्र के खेल परिदृश्य में पैराथलीटों के योगदान को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।