📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ameyajkamat
बिज़नेस
टाटा पावर की नवीकरणीय शाखा ने राजस्थान में 190.5 MW FDRE परियोजना का कमिशन किया
✍️ Business Standard
🗓 24 अग. 2026, 02:50 PM
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टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी ने राजस्थान में 190.5 MW की FDRE परियोजना का औपचारिक कमिशन किया, जिससे राज्य की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई।
टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड, टाटा पावर की नवीकरणीय शाखा, ने राजस्थान में 190.5 मेगावॉट की फ्लोटिंग डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) परियोजना को औपचारिक रूप से चालू किया है। कमिशनिंग समारोह में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परियोजना को भारत में नवीकरणीय क्षमता विस्तार के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में बताया।
यह नई इकाई राजस्थान के ग्रिड में स्वच्छ बिजली की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि करती है, जिससे राज्य के नवीकरणीय लक्ष्य और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में गति मिलती है। भूमि के बड़े हिस्से की आवश्यकता न होने के कारण FDRE मॉडल सतत विकास और कार्बन उत्सर्जन में कमी के राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप है।
टाटा पावर की नवीकरणीय शाखा ने अपने पोर्टफोलियो को तेज़ी से बढ़ाया है, और 190.5 MW की यह परियोजना अब तक की उसकी सबसे बड़ी FDRE परियोजनाओं में से एक है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस जोड़ से कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता में इज़ाफ़ा होगा और क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति की विश्वसनीयता सुधरेगी।
हालांकि उत्पादन के सटीक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन इस परियोजना से हजारों घरों को हरित ऊर्जा मिलने की उम्मीद है, जो भारत के व्यापक ऊर्जा परिवर्तन कार्यक्रम में योगदान देगा।
यह नई इकाई राजस्थान के ग्रिड में स्वच्छ बिजली की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि करती है, जिससे राज्य के नवीकरणीय लक्ष्य और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में गति मिलती है। भूमि के बड़े हिस्से की आवश्यकता न होने के कारण FDRE मॉडल सतत विकास और कार्बन उत्सर्जन में कमी के राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप है।
टाटा पावर की नवीकरणीय शाखा ने अपने पोर्टफोलियो को तेज़ी से बढ़ाया है, और 190.5 MW की यह परियोजना अब तक की उसकी सबसे बड़ी FDRE परियोजनाओं में से एक है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस जोड़ से कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता में इज़ाफ़ा होगा और क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति की विश्वसनीयता सुधरेगी।
हालांकि उत्पादन के सटीक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन इस परियोजना से हजारों घरों को हरित ऊर्जा मिलने की उम्मीद है, जो भारत के व्यापक ऊर्जा परिवर्तन कार्यक्रम में योगदान देगा।