📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
शिक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से स्कूलों में हिंदी पढ़ाने की अनुमति देने का आग्रह किया
✍️ timesofindia.indiatimes.com
🗓 18 सित. 2026, 01:01 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से अपने दृष्टिकोण में बदलाव कर स्कूलों में हिंदी को विषय के रूप में शामिल करने का आग्रह किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तमिलनाडु को हिंदी पढ़ाने के प्रति अपने पुराने विरोध को बदलना चाहिए। न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बहुभाषी दक्षता राष्ट्रीय एकता और छात्रों की शैक्षणिक प्रगति के लिए आवश्यक है।
यह टिप्पणी उस समय आई जब राज्य में भाषा नीति को लेकर बहस चल रही थी, जहाँ क्षेत्रीय भाषा के प्रति गर्व अक्सर व्यापक भाषा संपर्क की मांगों से टकराता है। जबकि न्यायालय के पास पाठ्यक्रम बदलने का सीधा अधिकार नहीं है, उसके बयानों का नैतिक प्रभाव बड़ा है और यह नीति चर्चाओं को प्रभावित कर सकता है।
तमिलनाडु के शिक्षा अधिकारी पहले तमिल और अंग्रेजी पर ज़ोर देते हुए सांस्कृतिक संरक्षण और व्यावहारिक कारणों को बताया था। सुप्रीम कोर्ट का आग्रह एक अधिक समावेशी दृष्टिकोण की ओर संकेत करता है, जिससे राज्य को हिंदी को मौजूदा विषयों के साथ शामिल करने की सोच अपनानी चाहिए।
शिक्षक संघों और भाषा समर्थक समूहों सहित विभिन्न पक्षों से इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया की उम्मीद है, जो भविष्य में पाठ्यक्रम सुधारों को आकार दे सकती है। यह विकास क्षेत्रीय स्वायत्तता और राष्ट्रीय भाषा लक्ष्यों के बीच चल रहे संवाद को उजागर करता है।
यह टिप्पणी उस समय आई जब राज्य में भाषा नीति को लेकर बहस चल रही थी, जहाँ क्षेत्रीय भाषा के प्रति गर्व अक्सर व्यापक भाषा संपर्क की मांगों से टकराता है। जबकि न्यायालय के पास पाठ्यक्रम बदलने का सीधा अधिकार नहीं है, उसके बयानों का नैतिक प्रभाव बड़ा है और यह नीति चर्चाओं को प्रभावित कर सकता है।
तमिलनाडु के शिक्षा अधिकारी पहले तमिल और अंग्रेजी पर ज़ोर देते हुए सांस्कृतिक संरक्षण और व्यावहारिक कारणों को बताया था। सुप्रीम कोर्ट का आग्रह एक अधिक समावेशी दृष्टिकोण की ओर संकेत करता है, जिससे राज्य को हिंदी को मौजूदा विषयों के साथ शामिल करने की सोच अपनानी चाहिए।
शिक्षक संघों और भाषा समर्थक समूहों सहित विभिन्न पक्षों से इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया की उम्मीद है, जो भविष्य में पाठ्यक्रम सुधारों को आकार दे सकती है। यह विकास क्षेत्रीय स्वायत्तता और राष्ट्रीय भाषा लक्ष्यों के बीच चल रहे संवाद को उजागर करता है।