📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट में कनॉट प्लेस के पास बीजेपी रैली के खिलाफ याचिका की सुनवाई
✍️ Amar Ujala · Mumbai
🗓 16 अक्टू. 2026, 12:17 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने कनॉट प्लेस के पास बीजेपी समर्थकों की रैली को रोकने की याचिका की सुनवाई तय की, जिससे दिल्ली व अन्य शहरों में पुलिस सतर्क है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास आयोजित होने वाली बीजेपी समर्थकों की रैली को रोकने की याचिका की सुनवाई तय की है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस रैली से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। सुनवाई आज निर्धारित है और कोर्ट संभावित रूप से रैली से पहले कोई अंतरिम आदेश जारी कर सकता है।
याचिका के वकीलों ने संभावित टकरावों की चिंता जताते हुए दिल्ली पुलिस को रैली को रोकने या कड़ी शर्तें लगाने का निर्देश मांगा है। बीजेपी ने अभी तक इस याचिका पर कोई टिप्पणी नहीं की है, पर वह अपने समर्थकों को इकट्ठा करने की तैयारी जारी रखे हुए है।
दिल्ली पुलिस ने अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती कर और भीड़ की निगरानी को सुदृढ़ करके उच्च सतर्कता अपनाई है। मुंबई सहित अन्य महानगरों में भी सुरक्षा उपायों को बढ़ाया गया है, जहाँ समर्थकों की बड़ी संख्या में इकट्ठा होने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से यह तय होगा कि रैली नियोजित रूप से आगे बढ़ेगी या प्रतिबंधित होगी।
यह मामला राजधानी में राजनीतिक रैलियों की कानूनी जांच को उजागर करता है, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों और राजनीतिक संगठनों के बीच बढ़ती टकराव को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का फैसला भविष्य में सार्वजनिक सभा संबंधी विवादों के लिए मिसाल स्थापित कर सकता है।
सिविल सोसाइटी समूह और राजनीतिक विश्लेषक कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह आगामी चुनावों में राजनीतिक अभियानों की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
याचिका के वकीलों ने संभावित टकरावों की चिंता जताते हुए दिल्ली पुलिस को रैली को रोकने या कड़ी शर्तें लगाने का निर्देश मांगा है। बीजेपी ने अभी तक इस याचिका पर कोई टिप्पणी नहीं की है, पर वह अपने समर्थकों को इकट्ठा करने की तैयारी जारी रखे हुए है।
दिल्ली पुलिस ने अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती कर और भीड़ की निगरानी को सुदृढ़ करके उच्च सतर्कता अपनाई है। मुंबई सहित अन्य महानगरों में भी सुरक्षा उपायों को बढ़ाया गया है, जहाँ समर्थकों की बड़ी संख्या में इकट्ठा होने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से यह तय होगा कि रैली नियोजित रूप से आगे बढ़ेगी या प्रतिबंधित होगी।
यह मामला राजधानी में राजनीतिक रैलियों की कानूनी जांच को उजागर करता है, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों और राजनीतिक संगठनों के बीच बढ़ती टकराव को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का फैसला भविष्य में सार्वजनिक सभा संबंधी विवादों के लिए मिसाल स्थापित कर सकता है।
सिविल सोसाइटी समूह और राजनीतिक विश्लेषक कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह आगामी चुनावों में राजनीतिक अभियानों की दिशा को प्रभावित कर सकता है।