📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / GUHAMBIKA
धर्म
धार में भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने तय किया सुनवाई का आदेश
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 21 अग. 2026, 05:37 PM
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सुप्रीम कोर्ट की संजय कुमार और संजीव सचदेवा की बेंच ने मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर पाँच याचिकाओं की सुनवाई का आदेश दिया, जो भोजशाला में हिंदू पूजा और पहुंच मार्गों को लेकर विवादित हैं।
न्यू दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर पाँच याचिकाओं की सुनवाई का समय निर्धारित किया है। याचिकाएँ इस बात को चुनौती देती हैं कि इस स्मारक में हिंदू पूजा‑हनुमान चालीसा सहित अनुष्ठान किए जा रहे हैं और अलग-अलग मार्गों से प्रवेश किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता तर्क देते हैं कि भोजशाला, जो संरक्षित धरोहर है, को एक तटस्थ स्थान बनाकर मुस्लिम समुदाय को बिना बाधा के नमाज़ का अधिकार होना चाहिए, तथा हिंदू अनुष्ठानों के अलग मार्ग उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश संजय कुमार और संजीव सचदेवा की बेंच करेंगे, जो विरासत संरक्षण एवं धार्मिक स्वतंत्रता के प्रावधानों की जाँच करेंगे।
स्थानीय स्तर पर दोनों समुदायों के बीच संवेदनशीलता बढ़ी है, जहाँ प्रत्येक पक्ष संरचना के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व को लेकर दावा रखता है। इस मामले का फैसला देश भर में संरक्षित स्मारकों पर धार्मिक प्रथाओं के प्रबंधन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को लिखित तर्क प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है और अंतिम निर्णय तक मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने की संभावना जताई है।
याचिकाकर्ता तर्क देते हैं कि भोजशाला, जो संरक्षित धरोहर है, को एक तटस्थ स्थान बनाकर मुस्लिम समुदाय को बिना बाधा के नमाज़ का अधिकार होना चाहिए, तथा हिंदू अनुष्ठानों के अलग मार्ग उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश संजय कुमार और संजीव सचदेवा की बेंच करेंगे, जो विरासत संरक्षण एवं धार्मिक स्वतंत्रता के प्रावधानों की जाँच करेंगे।
स्थानीय स्तर पर दोनों समुदायों के बीच संवेदनशीलता बढ़ी है, जहाँ प्रत्येक पक्ष संरचना के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व को लेकर दावा रखता है। इस मामले का फैसला देश भर में संरक्षित स्मारकों पर धार्मिक प्रथाओं के प्रबंधन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को लिखित तर्क प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है और अंतिम निर्णय तक मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने की संभावना जताई है।