📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
शिक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों में हिन्दी पढ़ाना अनिवार्य
✍️ The Times of India
🗓 18 सित. 2026, 05:34 AM
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जवाहर नवोदय विद्यालयों के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को हिन्दी को अनिवार्य विषय बनाए रखने की चेतावनी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि हिन्दी को पाठ्यक्रम से बाहर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केंद्र द्वारा स्थापित इस योजना में हिन्दी सभी राज्यों में अनिवार्य भाषा के रूप में निर्धारित है, और इसे हटाना राष्ट्रीय शैक्षिक नीति के उद्देश्य को नष्ट कर देगा।
तमिलनाडु सरकार को याद दिलाया गया कि नवोदय विद्यालयों को केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता और प्रशासनिक नियंत्रण मिलता है, इसलिए उन्हें निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करना आवश्यक है, जिसमें कक्षा I से हिन्दी अनिवार्य है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अनुपालन न करने पर कानूनी परिणाम और वित्तीय सहायता में कटौती हो सकती है।
इस सुनवाई में राज्य के अन्य शैक्षिक मुद्दों को नहीं छुआ गया; ध्यान केवल नवोदय विद्यालयों में भाषा आवश्यकता पर रहा। राज्य सरकार के अनुपालन योजना प्रस्तुत करने के बाद इस मामले पर पुनः विचार किया जाएगा।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय केंद्र-प्रशासित स्कूलों पर केंद्र सरकार के अधिकार को मजबूत करता है और भारतीय शैक्षिक प्रणाली में हिन्दी को लिंक भाषा के रूप में महत्व देता है।
तमिलनाडु सरकार को याद दिलाया गया कि नवोदय विद्यालयों को केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता और प्रशासनिक नियंत्रण मिलता है, इसलिए उन्हें निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करना आवश्यक है, जिसमें कक्षा I से हिन्दी अनिवार्य है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अनुपालन न करने पर कानूनी परिणाम और वित्तीय सहायता में कटौती हो सकती है।
इस सुनवाई में राज्य के अन्य शैक्षिक मुद्दों को नहीं छुआ गया; ध्यान केवल नवोदय विद्यालयों में भाषा आवश्यकता पर रहा। राज्य सरकार के अनुपालन योजना प्रस्तुत करने के बाद इस मामले पर पुनः विचार किया जाएगा।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय केंद्र-प्रशासित स्कूलों पर केंद्र सरकार के अधिकार को मजबूत करता है और भारतीय शैक्षिक प्रणाली में हिन्दी को लिंक भाषा के रूप में महत्व देता है।