📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने कहा: लिखित गिरफ्तारी कारण न देना अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन, लेकिन बंधक अधिकार नहीं
✍️ Live Law
🗓 24 सित. 2026, 05:33 PM
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अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में न देना अनुच्छेद 22(1) के तहत संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है, पर यह उल्लंघन तुरंत बंधक अधिकार नहीं देता।
सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में कहा कि अनुच्छेद 22(1) के तहत पुलिस को गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप से देना अनिवार्य है। इस आवश्यकता का उल्लंघन प्रक्रिया में खामी और मनमानी हिरासत के खिलाफ सुरक्षा को कमजोर करता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस उल्लंघन से आरोपी को तुरंत बंधक का अधिकार नहीं मिलता। बंधक का निर्णय अभी भी मामले की समग्र परिस्थितियों, आरोपित अपराध की गंभीरता और अन्य कानूनी मानदंडों पर निर्भर रहेगा।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय प्रक्रिया की कठोरता को बढ़ाता है, साथ ही बंधक मामलों में न्यायिक विवेक को बरकरार रखता है। यह राय देश में गिरफ्तारी प्रक्रियाओं की बढ़ती जांच के बीच आया है, जिससे प्रक्रिया के नियमों का कड़ाई से पालन करने की मांग बढ़ी है।
अधिकारियों को भविष्य में ऐसी खामियों से बचने के लिए अपने आंतरिक प्रोटोकॉल की समीक्षा करने की सलाह दी गई है, ताकि साक्ष्य की वैधता या आपराधिक प्रक्रिया में procedural challenges न उत्पन्न हों।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस उल्लंघन से आरोपी को तुरंत बंधक का अधिकार नहीं मिलता। बंधक का निर्णय अभी भी मामले की समग्र परिस्थितियों, आरोपित अपराध की गंभीरता और अन्य कानूनी मानदंडों पर निर्भर रहेगा।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय प्रक्रिया की कठोरता को बढ़ाता है, साथ ही बंधक मामलों में न्यायिक विवेक को बरकरार रखता है। यह राय देश में गिरफ्तारी प्रक्रियाओं की बढ़ती जांच के बीच आया है, जिससे प्रक्रिया के नियमों का कड़ाई से पालन करने की मांग बढ़ी है।
अधिकारियों को भविष्य में ऐसी खामियों से बचने के लिए अपने आंतरिक प्रोटोकॉल की समीक्षा करने की सलाह दी गई है, ताकि साक्ष्य की वैधता या आपराधिक प्रक्रिया में procedural challenges न उत्पन्न हों।