📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
शिक्षा
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका से झारखंड सर्विस परीक्षा में अनियमितताओं की CBI जांच की मांग
✍️ Live Law
🗓 21 अग. 2026, 05:36 AM
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सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका झारखंड सर्विस परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए CBI को शामिल करने की मांग कर रही है।
झारखंड सर्विस परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिसमें सीबीआई को जांच करने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता दावा करते हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में संभावित छेड़छाड़ हुई है, जिससे राज्य सेवाओं के चयन की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
याचिका में प्रक्रियात्मक त्रुटियों और परिणामों में हेरफेर के संकेत दिए गए हैं, और सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई को व्यापक जांच करने का निर्देश मांगा गया है। इसका उद्देश्य उम्मीदवारों के चयन को पारदर्शी और मेरिट‑आधारित बनाना है।
अब तक कोर्ट ने इस मामले पर कोई निर्णय नहीं दिया है। याचिकाकर्ता अदालत से परीक्षा रिकॉर्ड की जांच, संबंधित अधिकारियों के साक्षात्कार और किसी भी गड़बड़ी के प्रमाण निकालने की मांग कर रहे हैं।
यदि कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया, तो एजेंसी परीक्षा प्राधिकरण की जाँच, दस्तावेज़ों की समीक्षा और सुधारात्मक कदम सुझाने के लिए सक्षम होगी। इससे झारखंड की भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
आस्पायरों और राज्य अधिकारियों सहित सभी पक्ष कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो भारत में इसी तरह की परीक्षा विवादों के निपटारे में एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
याचिका में प्रक्रियात्मक त्रुटियों और परिणामों में हेरफेर के संकेत दिए गए हैं, और सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई को व्यापक जांच करने का निर्देश मांगा गया है। इसका उद्देश्य उम्मीदवारों के चयन को पारदर्शी और मेरिट‑आधारित बनाना है।
अब तक कोर्ट ने इस मामले पर कोई निर्णय नहीं दिया है। याचिकाकर्ता अदालत से परीक्षा रिकॉर्ड की जांच, संबंधित अधिकारियों के साक्षात्कार और किसी भी गड़बड़ी के प्रमाण निकालने की मांग कर रहे हैं।
यदि कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया, तो एजेंसी परीक्षा प्राधिकरण की जाँच, दस्तावेज़ों की समीक्षा और सुधारात्मक कदम सुझाने के लिए सक्षम होगी। इससे झारखंड की भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
आस्पायरों और राज्य अधिकारियों सहित सभी पक्ष कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो भारत में इसी तरह की परीक्षा विवादों के निपटारे में एक मिसाल स्थापित कर सकता है।