📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
स्वास्थ्य
सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनेताओं को हिरासत में रखने का आदेश दिया
✍️ The Times of India
🗓 07 सित. 2026, 09:34 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनेता को तुरंत हिरासत में लेना चाहिए, स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि डॉक्टरों पर शारीरिक हमला करने वाले राजनेता को तुरंत हिरासत में लेना चाहिए, उन्हें आज़ाद घूमने नहीं दिया जाना चाहिए। यह टिप्पणी देश भर में डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ते हमलों के मद्देनज़र की गई है, जिससे अस्पतालों और क्लीनिकों में सुरक्षा की चिंता बढ़ी है।
अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध को किसी भी अन्य हमले की तरह गंभीरता से लेना चाहिए, चाहे अपराधी का राजनीतिक पद कुछ भी हो। पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने और डॉक्टर पर हमला करने वाले राजनेता को तुरंत हिरासत में रखने का निर्देश दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि यह निर्णय भारतीय दंड संहिता और स्वास्थ्य कर्मियों एवं रोगियों की सुरक्षा अधिनियम (PHW Act) के तहत मौजूद प्रावधानों को मजबूत करता है, जो स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले को दंडनीय बनाता है।
इस फैसले से पुलिस प्रोटोकॉल पर असर पड़ेगा, और भविष्य में राजनेता शामिल होने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। न्यायपालिका का यह हस्तक्षेप स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वालों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डॉक्टर संघों सहित कई हितधारकों ने इस निर्देश का स्वागत किया है, इसे भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने और डॉक्टरों को डर और शारीरिक नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक कदम बताया है।
अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध को किसी भी अन्य हमले की तरह गंभीरता से लेना चाहिए, चाहे अपराधी का राजनीतिक पद कुछ भी हो। पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने और डॉक्टर पर हमला करने वाले राजनेता को तुरंत हिरासत में रखने का निर्देश दिया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि यह निर्णय भारतीय दंड संहिता और स्वास्थ्य कर्मियों एवं रोगियों की सुरक्षा अधिनियम (PHW Act) के तहत मौजूद प्रावधानों को मजबूत करता है, जो स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले को दंडनीय बनाता है।
इस फैसले से पुलिस प्रोटोकॉल पर असर पड़ेगा, और भविष्य में राजनेता शामिल होने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। न्यायपालिका का यह हस्तक्षेप स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वालों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डॉक्टर संघों सहित कई हितधारकों ने इस निर्देश का स्वागत किया है, इसे भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने और डॉक्टरों को डर और शारीरिक नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक कदम बताया है।