📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने छोटे कदम की बलात्कार‑हत्या मामले में मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला
✍️ India Today
🗓 25 सित. 2026, 02:01 AM
👁 12
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपनी छोटी सौतेली बेटी के बलात्कार‑हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
एक हालिया फैसले में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी अपराधी की सजा में बदलाव किया, मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। यह व्यक्ति अपनी नाबालिग सौतेली बेटी के साथ बलात्कार करने और फिर उसे मार डालने के अपराध में दोषी पाया गया था, जो पूरे देश में गहरी चिंता का कारण बना था।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के दस्तावेज़ों और अभियोजन तथा बचाव पक्ष के तर्कों की विस्तृत समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि इस अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा को घटाना उचित है। अदालत ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए यह निर्धारित किया कि आजीवन कारावास ही वर्तमान कानूनी मानकों के तहत उपयुक्त दंड है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी सजा में परिवर्तन दुर्लभ होते हैं और यह अदालत की विवेकशीलता को दर्शाता है, जहाँ अपराध की गंभीरता के साथ-साथ न्यायिक सिद्धांतों को भी ध्यान में रखा जाता है। इस निर्णय से अपराधी को अपने शेष जीवन तक जेल में रखा जाएगा, बिना किसी पैरोल की संभावना के।
यह फैसला पीड़िता के परिवार द्वारा न्याय की निरंतरता के रूप में सराहा गया है, साथ ही नाबालिगों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में मृत्युदंड के प्रयोग पर व्यापक चर्चा को भी जन्म दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के दस्तावेज़ों और अभियोजन तथा बचाव पक्ष के तर्कों की विस्तृत समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि इस अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा को घटाना उचित है। अदालत ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए यह निर्धारित किया कि आजीवन कारावास ही वर्तमान कानूनी मानकों के तहत उपयुक्त दंड है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी सजा में परिवर्तन दुर्लभ होते हैं और यह अदालत की विवेकशीलता को दर्शाता है, जहाँ अपराध की गंभीरता के साथ-साथ न्यायिक सिद्धांतों को भी ध्यान में रखा जाता है। इस निर्णय से अपराधी को अपने शेष जीवन तक जेल में रखा जाएगा, बिना किसी पैरोल की संभावना के।
यह फैसला पीड़िता के परिवार द्वारा न्याय की निरंतरता के रूप में सराहा गया है, साथ ही नाबालिगों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में मृत्युदंड के प्रयोग पर व्यापक चर्चा को भी जन्म दिया है।