📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गरीबों की प्रतीक्षा में लक्ज़री मुकदमे नहीं
✍️ TOI India
🗓 24 अग. 2026, 03:38 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि कई गरीब नागरिक न्याय की प्रतीक्षा में हैं और धनी वकीलों को महंगे, अनावश्यक मुकदमों में लिप्त नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बढ़ते केस बैकलॉग और कुछ धनी पक्षों द्वारा किए जाने वाले महंगे, लंबी अवधि के मुकदमों के बीच स्पष्ट अंतर को रेखांकित किया। न्यायालय ने कहा कि न्याय प्रणाली को उन लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिनके पास संसाधन नहीं हैं, न कि "लक्ज़री मुकदमे" को सहारा देना जो न्यायिक क्षमता को दबाव में डालते हैं।
न्यायाधीशों ने कहा कि गरीब वर्गों के मामलों में देरी प्रणालीगत असंतुलन को दर्शाती है, और उन्होंने कानूनी समुदाय से अधिक समानता वाला दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने अनावश्यक या अत्यधिक महंगे दावों की कड़ी जांच की आवश्यकता पर बल दिया, जो गरीबों की वास्तविक शिकायतों से ध्यान हटाते हैं।
अदालत के इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि न्याय तक पहुँच संविधानिक अधिकार है, और ऐसी कोई भी प्रथा जो इस सिद्धांत को कमजोर करती है—जैसे धनी लोगों द्वारा की जाने वाली भव्य कानूनी लड़ाइयाँ—उपर कड़ी नजर रखी जाएगी।
न्यायाधीशों ने कहा कि गरीब वर्गों के मामलों में देरी प्रणालीगत असंतुलन को दर्शाती है, और उन्होंने कानूनी समुदाय से अधिक समानता वाला दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने अनावश्यक या अत्यधिक महंगे दावों की कड़ी जांच की आवश्यकता पर बल दिया, जो गरीबों की वास्तविक शिकायतों से ध्यान हटाते हैं।
अदालत के इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि न्याय तक पहुँच संविधानिक अधिकार है, और ऐसी कोई भी प्रथा जो इस सिद्धांत को कमजोर करती है—जैसे धनी लोगों द्वारा की जाने वाली भव्य कानूनी लड़ाइयाँ—उपर कड़ी नजर रखी जाएगी।