📷 चित्र स्रोत: Times Now News (via NewsData)
बिज़नेस
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक ने भारत की अंतरिक्ष क्रांति और शुरुआती चुनौतियों पर की चर्चा
✍️ Times Now News
🗓 18 जून 2026, 01:01 PM
👁 23
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन चंदना ने 2018 में कंपनी की स्थापना की कठिनाइयों, जिसमें नीतिगत कमियां और प्रतिभा अधिग्रहण शामिल है, पर प्रकाश डाला, क्योंकि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुजर रहा है।
स्काईरूट एयरोस्पेस के प्रमुख व्यक्तियों में से एक, पवन चंदना ने 2018 में कंपनी की स्थापना के शुरुआती दौर में सामना की गई चुनौतियों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने सहायक नीतियों की प्रारंभिक अनुपस्थिति और कुशल प्रतिभा को प्राप्त करने में कठिनाइयों जैसी महत्वपूर्ण बाधाओं पर जोर दिया, जो एक उभरते हुए एयरोस्पेस उद्यम के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक उल्लेखनीय क्रांति का अनुभव कर रहा है, जिसमें स्काईरूट एयरोस्पेस जैसे निजी संस्थान इसके विकास में तेजी से योगदान दे रहे हैं। चंदना का दृष्टिकोण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी फर्म को शुरू से बनाने की जटिलताओं से निपटने के लिए आवश्यक उद्यमशीलता की भावना और लचीलेपन को रेखांकित करता है।
इस बातचीत में अंतरिक्ष उद्योग से जुड़े अंतर्निहित जोखिमों और इस उन्नत क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दृष्टि पर भी बात की गई। स्काईरूट एयरोस्पेस इस नए युग में सबसे आगे रहने, भारत से अंतरिक्ष अन्वेषण और नवाचार की सीमाओं को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक उल्लेखनीय क्रांति का अनुभव कर रहा है, जिसमें स्काईरूट एयरोस्पेस जैसे निजी संस्थान इसके विकास में तेजी से योगदान दे रहे हैं। चंदना का दृष्टिकोण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी फर्म को शुरू से बनाने की जटिलताओं से निपटने के लिए आवश्यक उद्यमशीलता की भावना और लचीलेपन को रेखांकित करता है।
इस बातचीत में अंतरिक्ष उद्योग से जुड़े अंतर्निहित जोखिमों और इस उन्नत क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दृष्टि पर भी बात की गई। स्काईरूट एयरोस्पेस इस नए युग में सबसे आगे रहने, भारत से अंतरिक्ष अन्वेषण और नवाचार की सीमाओं को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।