📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Matti Blume
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सिक्किम के 3 साल के “लिटिल मिल्कमैन” ने माँ की मदद के लिए स्कूल से पहले दूध डिलीवर किया
✍️ The Economic Times
🗓 26 सित. 2026, 12:02 PM
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सिक्किम के एक तीन साल के बच्चे ने अपनी माँ की मदद के लिए स्कूल से पहले दूध वितरित किया, जिससे उसे “लिटिल मिल्कमैन” का उपनाम मिला।
सिक्किम के एक छोटे बच्चे ने स्कूल जाने से पहले स्थानीय घरों में दूध पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है। तीन साल की उम्र में शुरू किया यह काम, जिससे उसकी माँ पर आर्थिक बोझ कम हो रहा है, क्योंकि वह अब अकेले दूध वितरित नहीं कर पाती थीं।
इस छोटे डिलीवरी बॉय को जल्दी ही “लिटिल मिल्कमैन” का उपनाम मिला, और पड़ोसियों व राहगीरों ने उसकी इस पहल की सराहना की। वह अपने घर से निकटवर्ती ग्राहकों तक एक छोटा इन्सुलेटेड कंटेनर लेकर चलता है।
इकोनॉमिक टाइम्स ने इस कहानी को ग्रामीण भारत में शुरुआती उम्र की उद्यमिता और पारिवारिक सहयोग का उदाहरण बताया। बच्चा स्कूल में पढ़ता रहता है, जबकि उसकी माँ इस अतिरिक्त आय और बेटे में जिम्मेदारी की भावना के लिए आभारी हैं।
स्थानीय अधिकारियों ने इस पहल की प्रशंसा की, यह कहा कि ऐसे सामुदायिक प्रयास दूरस्थ क्षेत्रों में औपचारिक रोजगार योजनाओं को पूरक कर सकते हैं। इस गतिविधि के लिए कोई औपचारिक व्यापार पंजीकरण या लाभ आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि यह मुख्यतः घर की आय बढ़ाने के लिए किया जाता है।
बच्चे की कहानी ने सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित किया, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में परिवारों को मिलने वाली चुनौतियों और उन्हें हल करने के रचनात्मक तरीकों पर प्रकाश पड़ा।
इस छोटे डिलीवरी बॉय को जल्दी ही “लिटिल मिल्कमैन” का उपनाम मिला, और पड़ोसियों व राहगीरों ने उसकी इस पहल की सराहना की। वह अपने घर से निकटवर्ती ग्राहकों तक एक छोटा इन्सुलेटेड कंटेनर लेकर चलता है।
इकोनॉमिक टाइम्स ने इस कहानी को ग्रामीण भारत में शुरुआती उम्र की उद्यमिता और पारिवारिक सहयोग का उदाहरण बताया। बच्चा स्कूल में पढ़ता रहता है, जबकि उसकी माँ इस अतिरिक्त आय और बेटे में जिम्मेदारी की भावना के लिए आभारी हैं।
स्थानीय अधिकारियों ने इस पहल की प्रशंसा की, यह कहा कि ऐसे सामुदायिक प्रयास दूरस्थ क्षेत्रों में औपचारिक रोजगार योजनाओं को पूरक कर सकते हैं। इस गतिविधि के लिए कोई औपचारिक व्यापार पंजीकरण या लाभ आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि यह मुख्यतः घर की आय बढ़ाने के लिए किया जाता है।
बच्चे की कहानी ने सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित किया, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में परिवारों को मिलने वाली चुनौतियों और उन्हें हल करने के रचनात्मक तरीकों पर प्रकाश पड़ा।